कंडक्टर भर्ती में केस दर्ज करने से शिमला पुलिस के हाथ खड़े
अदालत के आदेश के बावजूद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में कंडक्टर भर्ती में धांधली पर एफआईआर करने में शिमला पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने कोर्ट से कहा है कि जांच करने के लिए सदर थाना में इंस्पेक्टर से ऊपर के रैंक का अफसर नहीं है।
पीसी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में डीएसपी से ऊपर के रैंक का अफसर ही जांच कर सकता है। एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि अभी एफआईआर दर्ज नहीं की है। इस मामले में ऐसे कई पहलू हैं, जिन्हें देखने के बाद जिला अदालत से शिमला पुलिस ने आग्रह किया है।
बता दें कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने एचआरटीसी के खिलाफ धारा 420, 120बी व सेक्शन 13(1) (डी) भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अब अदालत ही तय करेगी कि धांधली मामले की जांच शिमला पुलिस करेगी या किसी दूसरी एजेंसी को मामला सौंपा जाएगा।
2003-04 में हुई थी भर्ती
कंडक्टर भर्ती वर्ष 2003-04 में हुई थी। आरोप था कि भर्ती के विज्ञापन में बताए गए 200 प्वाइंट रोस्टर को भी भर्ती प्रक्रिया में नहीं अपनाया गया। डिविजन स्तर पर दिखाई गई मेरिट सूचियों पर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे।
जिन 365 उम्मीदवारों को चुना गया, वे 55 में से 35 अंक ही प्राप्त कर पाए। 14 हजार उम्मीदवारों ने लिखित परीक्षा पास करके इंटरव्यू में हिस्सा लिया था। आरोप यह भी है कि भर्ती की कोई भी प्रतीक्षा सूची नहीं बनाई गई बावजूद इसके 13 अन्य उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी गई।
साक्षात्कार की शीट्स में कटिंग के आरोप
भर्ती में चयनित हुए 12 उम्मीदवारों के साक्षात्कार से संबंधित शीट्स में कटिंग के संगीन आरोप भी लगे हैं। इनमें 7 नगरोटा बगवां क्षेत्र से थे। धर्मशाला डिविजन में चयनित किए गए कुल 147 उम्मीदवारों में से 73 चयनित उम्मीदवार नगरोटा बगवां विधानसभा से थे जबकि रोहड़ू से 50 उम्मीदवार भर्ती किए गए।