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दाल फर्जीवाड़े की रद्द हो सकती है एफआईआर

Tue, 03 Nov 2015 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 03 Nov 2015 10:56 AM IST
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shimla police may cancel FIR in pulse case.

प्रदेश में सरकारी राशन की दुकानों में दालों की सप्लाई के फर्जीवाड़े में पुलिस खाद्य आपूर्ति निगम की एफआईआर को रद्द कर सकती है। मामले में विजिलेंस पहले ही जांच कर चुका है। केवल टेंडर फार्म में गड़बड़ी पर दो अफसरों को चार्जशीट कर सरकार को रिपोर्ट सौंप चुका है। सरकार को दी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि दाल घोटाले को लेकर साक्ष्य नहीं मिले हैं।

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टेंडर में दर्शाई दाल के सैंपल तक सिविल सप्लाई मुहैया नहीं करवा पाया। न ही दाल की घटिया सप्लाई को लेकर उन्हें गलत फीडबैक मिला है। मुंबई पोर्ट से दालों की सप्लाई होनी थी। टेंडर की शर्तों के मुताबिक इसमें टेंडर धारक को ट्रांसपोर्टेशन, प्रोसेसिंग और सप्लाई तीनों के रेट निर्धारित किए थे। मुंबई पोर्ट से दाल को प्रोसेसिंग के लिए ले जाना था।
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उसके बाद प्रदेश में सिविल सप्लाई के गोदामों में पहुंचाना था। जांच में पाया कि संबंधित फर्म ने प्रदेश में दालों की सप्लाई की है। मुंबई तक विजिलेंस टीम पहुंची। वहां दालों से भरे ट्रकों के गेट पास कटे हैं। विजिलेंस यह पता लगाने में असफल रहा कि क्या ये ट्रक गंतव्य तक पहुंचे हैं या नहीं। दाल टैक्स फ्री आइटम है, इसका रास्ते में कहीं रिकॉर्ड नहीं रहता।
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टोल प्लाजा पर ट्रक नंबरों के आधार पर तफ्तीश करनी चाही, लेकिन जवाब मिला कि रोजाना 50 हजार गाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में पुराना रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। दालों की सप्लाई के कई लॉट के सैंपल फेल भी निकले, जिस पर सिविल सप्लाई ने संबंधित फर्म पर नियम के मुताबिक जुर्माना भी लगाया। जो लॉट सही थे, उसके भुगतान को खींचतान चल रही है।

सूत्र बताते हैं कि लगभग आधी भुगतान राशि फर्म को दी जा चुकी है। ऐसे में वे अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं, जिन्होंने पहले आधा भुगतान कर दिया। अब बाकी राशि रोक दी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सिविल सप्लाई इसे शुरू से फर्जीवाड़ा मान रहा था तो पहले भुगतान क्यों किया? इस फर्जीवाड़े की तफ्तीश को लेकर शिमला पुलिस पसोपेश में पड़ गई है।


मामले की रिपोर्ट मांगी गई है

इस मामले पर रिपोर्ट मांगी है। जांच में पाया जाता है कि यह वही मामला है, जिसकी तफ्तीश विजिलेंस कर चुका है तो एफआईआर रद्द कर दी जाएगी। शिकायतकर्ता के विरुद्ध पुलिस कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है। सोमवार को शिमला पुलिस ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड विजिलेंस से अपने कब्जे में ले लिया है।- डी डब्ल्यू नेगी, पुलिस अधीक्षक, शिमला

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