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Shimla News: टाउनहॉल में महापौर के लिए कॉन्फ्रेंस हॉल बनाने में फंसा पेच, रोका प्रस्ताव
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नगर निगम ने आनन-फानन में योजना तो बनाई लेकिन कानूनी राय लेना भूल गया
टाउनहॉल के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट ने जारी कर रखे हैं सख्त आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के मालरोड स्थित टाउनहॉल में महापौर के लिए कॉन्फ्रेंस हॉल बनाने की नगर निगम की योजना पर विवाद हो गया है। इस योजना पर सवाल उठने के बाद नगर निगम को इसका प्रस्ताव भी रोकना पड़ा है। अब कानूनी राय लेने के बाद ही इसका प्रस्ताव सदन में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। ऐतिहासिक टाउनहॉल भवन में महापौर कार्यालय के बाहर एक बड़ा हॉल काफी समय से खाली पड़ा है। नगर निगम ने योजना बनाई थी कि यहां महापौर का कॉन्फ्रेंस कार्यालय तैयार किया जाएगा। अभी महापौर कार्यालय में इसकी सुविधा नहीं है। इसके लिए कुछ दिन पहले कानूनी राय लिए बिना ही आनन-फानन में प्रस्ताव भी तैयार किया गया।
वित्त संविदा समिति की बैठक में चर्चा के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए सदन में लाने की तैयारी थी लेकिन इससे पहले ही प्रस्ताव पर सवाल उठना शुरू हो गए। लोगों का कहना है कि टाउनहॉल भवन में सिर्फ महापौर और उप महापौर के दफ्तर के लिए प्रदेश हाईकोर्ट ने जगह दे रखी है। इसके अलावा बाकी जगह के इस्तेमाल को लेकर जब तक स्पष्ट आदेश नहीं मिल जाते, तब तक निगम इसमें कोई काम नहीं कर सकता। निगम प्रशासन भी यह सवाल उठने के बाद बैकफुट पर आ गया। शनिवार को नगर निगम सदन से ठीक पहले इस प्रस्ताव को एजेंडे से भी हटा दिया गया। सदन में पार्षदों ने सवाल भी उठाए कि आखिर एक प्रस्ताव गायब क्यों है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव पर कानूनी राय ली जा रही है। सभी पहलुओं को देखने के बाद ही इसे सदन में लाने पर फैसला लिया जाएगा। सदन में आयुक्त सचिन कंवल ने भी सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरा रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही प्रस्ताव सदन में लाए जाएं।
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टाउनहॉल के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट ने जारी कर रखे हैं सख्त आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के मालरोड स्थित टाउनहॉल में महापौर के लिए कॉन्फ्रेंस हॉल बनाने की नगर निगम की योजना पर विवाद हो गया है। इस योजना पर सवाल उठने के बाद नगर निगम को इसका प्रस्ताव भी रोकना पड़ा है। अब कानूनी राय लेने के बाद ही इसका प्रस्ताव सदन में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। ऐतिहासिक टाउनहॉल भवन में महापौर कार्यालय के बाहर एक बड़ा हॉल काफी समय से खाली पड़ा है। नगर निगम ने योजना बनाई थी कि यहां महापौर का कॉन्फ्रेंस कार्यालय तैयार किया जाएगा। अभी महापौर कार्यालय में इसकी सुविधा नहीं है। इसके लिए कुछ दिन पहले कानूनी राय लिए बिना ही आनन-फानन में प्रस्ताव भी तैयार किया गया।
वित्त संविदा समिति की बैठक में चर्चा के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए सदन में लाने की तैयारी थी लेकिन इससे पहले ही प्रस्ताव पर सवाल उठना शुरू हो गए। लोगों का कहना है कि टाउनहॉल भवन में सिर्फ महापौर और उप महापौर के दफ्तर के लिए प्रदेश हाईकोर्ट ने जगह दे रखी है। इसके अलावा बाकी जगह के इस्तेमाल को लेकर जब तक स्पष्ट आदेश नहीं मिल जाते, तब तक निगम इसमें कोई काम नहीं कर सकता। निगम प्रशासन भी यह सवाल उठने के बाद बैकफुट पर आ गया। शनिवार को नगर निगम सदन से ठीक पहले इस प्रस्ताव को एजेंडे से भी हटा दिया गया। सदन में पार्षदों ने सवाल भी उठाए कि आखिर एक प्रस्ताव गायब क्यों है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव पर कानूनी राय ली जा रही है। सभी पहलुओं को देखने के बाद ही इसे सदन में लाने पर फैसला लिया जाएगा। सदन में आयुक्त सचिन कंवल ने भी सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरा रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही प्रस्ताव सदन में लाए जाएं।
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