शिमला: जुब्बल-कोटखाई के विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का निधन, पीजीआई में थे भर्ती
बरागटा पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती थे और कल ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर उनका कुशलक्षेम पूछने पीजीआई गए थे। बरागटा ठाकुर सरकार में मुख्य सचेतक भी थे।
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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक, मुख्य सचेतक एवं पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा (69) का शनिवार को पीजीआई चंडीगढ़ में देहांत हो गया। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद दोबारा बीमार होने पर उन्हें पीजीआई में दाखिल किया गया था। पोस्ट कोविड प्रभाव के चलते वह बीमार हो गए थे। यहां करीब पिछले कई सप्ताह से दाखिल थे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनके देहांत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उनकी पार्थिव देह को चंडीगढ़ में ही श्रद्धांजलि दी। एक दिन पहले ही सीएम उनसे मिलने पीजीआई गए थे।
बरागटा के देहांत पर शनिवार को प्रस्तावित प्रदेश कैबिनेट की बैठक को स्थगित कर दिया गया। इसके अलावा भाजपा के अन्य सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। नगर निगम के मतदान के दिन करीब डेढ़ माह पहले नरेंद्र बरागटा कोरोना की चपेट में आए थे। इसके बाद ठीक हो गए थे, लेकिन पोस्ट कोविड इफेक्ट के चलते वह पिछले 20-22 दिन से पीजीआई में उपचाराधीन थे। कोरोना से ठीक होने के बाद उन्हें सांस में दिक्कत थी। कुछ माह पहले इनकी हार्ट की सर्जरी भी हुई थी। बरागटा तीसरी बार विधायक बने थे। दो बार बागवानी मंत्री रहे। रविवार को पैतृक गांव टहटोली में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पीजीआई से पहले उनका शव हिमाचल भवन चंडीगढ़ ले जाया गया।
वहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपाध्यक्ष सुरेश कश्यप समेत कई भाजपा नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शव को जुब्बल कोटखाई लाते समय सोलन, ठियोग, छैला समेत कई जगह उनके समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। समर्थक सिसक-सिसक कर रोए और नरेंद्र बरागटा अमर रहे के नारे लगे। पैतृक गांव ले जाने से पहले शिमला में भाजपा कार्यालय में पार्टी नेताओं ने पार्थिव देह पर माल्यार्पण किया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे पार्टी के लिए बड़ी क्षति बताते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को इस असहनीय दु:ख को सहने की शक्ति प्रदान करने की भगवान से प्रार्थना की। उनके बेटे चेतन बरागटा और अन्य परिजनों के समक्ष उन्होंने गहरा शोक जताया।
बरागटा की उपलब्धियां
देश में पहली बार हिमाचल के लिए एंटी हेलगन लाए थे बरागटा
जुब्बल-कोटखाई में 60 साल पुराने कांग्रेस के गढ़ में जीत दर्ज कर रचा इतिहास
पंचायत प्रधान से मंत्री पद तक पहुंचे, बड़े बागवानी नेता के रूप में उभरे
बागवानी महत्व की ठियोग-हाटकोटी सड़क के निर्माण के लिए भी लड़ी लंबी लड़ाई
सेब के लिए नई विदेशी किस्में लाईं, टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की
फतेहपुर व मंडी के साथ होगा जुब्बल कोटखाई में उपचुनाव
फतेहपुर से विधायक सुजान सिंह पठानिया और मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा के बाद अब विधायक नरेंद्र बरागटा की असामयिक मृत्यु के चलते जुब्बल कोटखाई विधानसभा सीट भी खाली हो गई है। इस सीट के खाली होने के साथ ही विधानसभा ने राज्य निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना भेज दी है। अब फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र और मंडी लोकसभा क्षेत्र के साथ ही जुब्बल कोटखाई विस क्षेत्र के लिए भी उपचुनाव होगा। सूत्रों का कहना है कि अगस्त के पहले हफ्ते तक होने वाले संभावित उपचुनाव में अब इस सीट पर भी फतेहपुर और मंडी के साथ मतदान कराया जा सकता है।
राज्यपाल, विस अध्यक्ष ने बरागटा के निधन पर दुख जताया
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार में मुख्य सचेतक, जुब्बल कोटखाई के विधायक तथा पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, प्रेम कुमार धूमल, वीरभद्र सिंह, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर, एआईसीसी सदस्य और पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर, कांग्रेस विधायक और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू, कांग्रेस सेवादल प्रदेश अध्यक्ष अनुराग शर्मा, रंजन भारद्वाज, उपाध्यक्ष संतराम धीमान, सुशील ठाकुर, महासचिव गोपाल शर्मा, उषा मेहता, बलदेव ठाकुर, कंवर प्रताप सिंह, विजय कुमार, मनोहर लाल कौंडल, वीरेंद्र जसवाल, राजेंद्र शर्मा, सुनीता ठाकुर और कृष्णा ने शोक व्यक्त किया है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी के राज्य सचिव ओंकार शाद, राज्य सचिव मंडल सदस्य संजय चौहान, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष खुशीराम बालनाहटा ने भी दुख जताया है।
1998 में पहली बार विधायक बने थे बरागटा
नरेंद्र बरागटा वर्ष 1998 में शिमला विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने और प्रदेश में भाजपा नेतृत्व की सरकार में बागवानी राज्य मंत्री बने। वर्ष 2007 में वह दोबारा जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के लिए चुने गए और भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए। नरेंद्र बरागटा वर्ष 2017 में फिर विधानसभा के लिए चुने गए और मुख्य सचेतक बनाए गए।
वर्ष 1969 में उतरे थे छात्र राजनीति में
नरेंद्र बरागटा का जन्म 15 सितंबर, 1952 को सूरत सिंह बरागटा और गींदा बरागटा के घर में जिला शिमला की तहसील कोटखाई डाकघर बघार गांव टहटोली में हुआ। उनका विवाह पुष्पा बरागटा के साथ हुआ। उनके दो पुत्र चेतन बरागटा और ध्रुव बरागटा हैं। 1969 में डीएवी स्कूल शिमला में वह छात्र संसद के महासचिव बने। 1971 में एसडीबी कॉलेज शिमला के केंद्रीय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए। 1978 से लेकर 1982 तक वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे तो 1983 से लेकर 1988 तक जिला शिमला भाजपा के महामंत्री बने। 1993 से लेकर 1998 तक भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे। वह राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।