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मनमानी: सामुदायिक भवन चाहिए तो डीजे और कैटरिंग भी लेनी पड़ेगी
Mon, 03 Jul 2023 11:41 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 03 Jul 2023 11:41 AM IST
सार
शहर में बने सामुदायिक केंद्रों में ठेकेदारों की मनमानी को देखते हुए नगर निगम ने इन्हें वापस लेने की तैयारी कर ली है। इसके लिए संबंधित पार्षदों की एक कमेटी बनाने का भी फैसला लिया गया है।
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सामुदायिक भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शहरवासियों को शादी समारोहों समेत अन्य आयोजनों की सुविधा देने के लिए बनाए गए नगर निगम के कई सामुदायिक भवन अब लूट का अड्डा बनने लगे हैं। नगर निगम को इन सामुदायिक भवनों में मनमाने शुल्क वसूलने की शिकायतें मिली हैं। शहर के समरहिल, कृष्णानगर, कैथू, न्यू शिमला, भराड़ी, ढली, खलीनी समेत कई उपनगरों में नगर निगम ने जनता की सुविधा के लिए सामुदायिक भवन तैयार किए हैं।
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इनका संचालन ठेकेदार के जरिये किया जा रहा है। नगर निगम ने हर सामुदायिक केंद्र का किराया तय किया है। इससे अधिक शुल्क लेने पर ठेकेदार पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। लेकिन कई ठेकेदारों ने लूट शुरू कर दी है। शादी समारोह के लिए सामुदायिक भवन किराये पर देते वक्त ठेकेदार अपना डीजे, कैटरिंग, पार्किंग आदि का शुल्क भी वसूल रहे हैं। जो लोग ठेकेदार से डीजे, कैटरिंग की सुविधा नहीं लेना चाहते, उन्हें सामुदायिक केंद्र की सुविधा नहीं दी जा रही।
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नगर निगम सदन में शनिवार को समरहिल पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने भी सामुदायिक केंद्र का मामला उठाया था। कहा कि उनके वार्ड में बना सामुदायिक केंद्र आम जनता को नहीं मिल रहा। ठेकेदार सामुदायिक केंद्र किराये पर देने के एवज में कई शर्तें थोप रहा है। यही नहीं, ठेकेदार नगर निगम को किराया भी नहीं दे रहा है। इसे डिफाल्टर घोषित किया जाना चाहिए। सदन में अन्य पार्षदों ने भी सामुदायिक केंद्रों को लेकर शिकायतें की थीं।
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शिकायतें मिलने पर निगम ने बनाई कमेटी, ठेकेदारों से भवन वापस लेने की तैयारी
शहर में बने सामुदायिक केंद्रों में ठेकेदारों की मनमानी को देखते हुए नगर निगम ने इन्हें वापस लेने की तैयारी कर ली है। इसके लिए संबंधित पार्षदों की एक कमेटी बनाने का भी फैसला लिया गया है। यह कमेटी बताएगी कि इन सामुदायिक केंद्रों का संचालन किस तरह से किया जा सकता है। शहर में नगर निगम के सामुदायिक केंद्रों का किराया पांच से 15 हजार रुपये प्रतिदिन तय है। वहीं, निजी बैंक्वेट हॉल में एक से तीन लाख रुपये तक किराया वसूला जाता है।
ठेकेदारों की मनमानी नहीं चलेगी
ठेकेदारों की मनमानी नहीं चलेगी। सामुदायिक केंद्रों के संचालन में मनमानी की शिकायतें मिली है। हमने कमेटी बना दी है जो रिपोर्ट देगी कि कैसे इनका बेहतर संचालन हो सकता है। - सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला।