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शिमला: शिक्षक अवार्ड के लिए बनाए गए नियमों को अदालत में पेश नहीं कर सकी राज्य सरकार

Wed, 07 Dec 2022 07:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 07 Dec 2022 07:58 PM IST
सार

याचिकाकर्ता राज कुमार ने राज्य शिक्षक अवार्ड को चुनौती दी है। आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग ने बिना पारदर्शिता के तीन शिक्षकों को राज्य शिक्षक अवार्ड दिया है।

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shikshak puraskar case in himachal pradesh high court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य शिक्षक अवार्ड के लिए बनाए गए नियमों को राज्य सरकार अदालत के समक्ष पेश नहीं कर पाई। इसके लिए सरकार ने अदालत से दो हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की है। इस मामले में सरकार ने अदालत को बताया था कि राज्य शिक्षक अवार्ड देने पर सिर्फ सरकार निर्णय लेती है।

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इसके लिए शिक्षकों को आवेदन करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने शिक्षा विभाग के इस जवाब से असंतोष जताया था। अदालत ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक को आदेश दिए थे कि वह इस बारे बनाए गए नियमों की जानकारी अदालत को सौंपे। राज्य सरकार की ओर से दायर जवाब में शिक्षा निदेशक ने बताया था कि विशेष अवार्ड देने के लिए सरकार ने राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया है। शिक्षा विभाग की ओर से किसी भी शिक्षक की अनुशंसा नहीं की जाती है। याचिकाकर्ता का आवेदन उप निदेशक ने यह कहकर लौटाया था कि राज्य शिक्षक अवार्ड सरकार अपने स्तर पर देती है।
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इसके लिए आवेदन किए जाने की जरूरत नहीं है। बता दें कि याचिकाकर्ता राज कुमार ने राज्य शिक्षक अवार्ड को चुनौती दी है। आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग ने बिना पारदर्शिता के तीन शिक्षकों को राज्य शिक्षक अवार्ड दिया है। इनमें कुल्लू जिला के गजेंद्र सिंह ठाकुर, मंडी के हरीश कुमार और सिरमौर के सुरेंद्र सिंह को दिए गए राज्य शिक्षक अवार्ड दिया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार अपनी मर्जी से राज्य शिक्षक अवार्ड के लिए चुनती है।

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जंगी-थोपन प्रोजेक्ट: अगली सुनवाई 12 दिसंबर को

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जंगी-थोपन मामले पर बहस पूरी न होने पर अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित हुई है। बुधवार को  अदाणी समूह की ओर से बहस की गई। मामले को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है।

विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदाणी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा किए। बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया।

ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट राशि वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदाणी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया।

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