शांता की आत्मकथा में दिखेगी सच बोलने पर मंत्री पद से इस्तीफा लेने की टीस
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भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने अपनी आत्मकथा ‘निज पथ का अविचल पंथी’ पूरी कर ली है। इसमें वर्ष 1999 में केंद्र में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले व ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद राजनीतिक मुद्दों पर सच बोलने की सियासी सजा की टीस दिखेगी। किताब में शांता कुमार ने 2002 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विकास कार्यों की तारीफ करने पर मंत्री पद से हटाने का जिक्र किया गया है।
यही नहीं, पार्टी के शीर्ष पदों पर रहने के बावजूद सियासी हाशिये पर धकेलने समेत कई सुनहरे और खटास भरे पलों को किताब में उतारा है। इस किताब का विमोचन मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की मौजूदगी में होगा। आत्मकथा में भाजपा में बुजुर्ग नेताओं पर लिखा गया है, जिसका विमोचन के बाद खुलासा होगा। किताब के कई सच्चे और कड़वे पहलू सियासी उथल-पुथल मचा सकते हैं।
विशेष बातचीत में शांता कुमार ने बताया कि उन्होंने आत्मकथा में अपनी छह दशक की राजनीति में घटित हर पहलू का बेबाकी से वर्णन किया है। कोरोना से दम तोड़ने वाली पत्नी संतोष शैलजा के सहयोग समेत पार्टी के शीर्ष पदों पर रहने तो कई बार अपनी पार्टी की ओर से ही सियासी हाशिए पर धकेलने का भी जिक्र है।
किताब में 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक से लेकर दीये की लौ से कैसे प्रदेश भाजपा को बुलंदियों पर लाने, बाबरी विध्वंस पर 6 दिसंबर, 1992 को उनकी सरकार गिरने के बाद 1997 में प्रदेश भाजपा के शीर्ष से कैसे हाशिए पर धकेला गया, इसका भी वर्णन है।
2007 में मंडी के पड्डल मैदान में जनता की पुरजोर मांग पर मुख्यमंत्री का दावेदार होने के बावजूद पार्टी की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री घोषित न करने का भी जिक्र है। आपातकाल में 19 माह तक नाहन जेल और हिमाचल भाजपा में सर्वेसर्वा होने के बाद परिवार को दूर रखना, 1989 में सुलह व पालमपुर विस से चुनाव के साथ लोकसभा का चुनाव जीतने का भी उल्लेख किया गया है।
किताब लिखने में लगा एक साल
वरिष्ठ नेता शांता कुमार की लिखी पुस्तक के कवर पेज पर शांता के साथ उनकी पत्नी का फोटो है। पत्नी संतोष शैलजा का उनके सियासी जीवन में सहयोग का खासा जिक्र है। शांता कुमार को इस पुस्तक को लिखने के लिए करीब एक साल का वक्त लगा है।