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सात हजार कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी खबर

Sun, 18 Jan 2015 06:43 PM IST
Updated Sun, 18 Jan 2015 06:43 PM IST
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seven thousand employees of himachal will get workcharge benefits: supreme court

हिमाचल के सभी सरकारी विभागों में कार्यरत करीब सात हजार कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने वर्कचार्ज लाभ देने के आदेश जारी किए हैं। इनमें से तीन हजार कर्मचारियों को पेंशन लाभ भी देना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में हिमाचल सरकार की सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जारी किए हैं।

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इस पीठ में दो अन्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सीकरी और अरुण मिश्रा शामिल थे। प्रार्थियों के अधिवक्ता अश्वनी कुमार गुप्ता ने इसे उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार की सभी अपीलों को खारिज करते हुए सरकार को हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को फालो करने के आदेश दिए हैं।
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हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को फालो करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट

seven thousand employees of himachal will get workcharge benefits: supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को आदेश दिए हैं कि हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को फालो ‌किया जाए जिसमें दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को आठ साल से वर्कचार्ज लाभ देने के आदेश दिए गए थे। इसमें सारे वित्तीय लाभ देने को भी कहा गया था। इस फैसले का एक पहलू यह है कि इसमें सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग सात हजार कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

दूसरा पहलू यह है कि लगभग तीन हजार कर्मचारी अब पेंशन के दायरे में भी आ जाएंगे। दोनों ही तरह के लाभ लोक निर्माण, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य, वन, कृषि, बागवानी आदि तमाम विभागों के कर्मचारियों को देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नेपालियों से संबंधित सरकार की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। अब बचे नेपाली कर्मचारियों की भी नियमितीकरण की आस बन गई है।

सरकार ने नहीं बनाए थे वर्कचार्ज

हिमाचल में लगभग सात हजार कर्मचारियों की सेवाएं 13-14 साल बाद नियमित की गईं। इन्हें इतने समय तक दैनिक वेतनभोगी रखा गया। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार ये दैनिक वेतनभोगी आठ साल रहने के बाद वर्कचार्ज माने जाएंगे। सरकार ने इन्हें नियमानुसार आठ साल बाद वर्कचार्ज नहीं बनाया था। पेंशन लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो वर्ष 1994 और 1995 में दैनिक वेतनभोगी लगे थे।

ये 15 मई 2003 से पहले के नियुक्त कर्मचारी माने जाएंगे। सरकार ने पेंशन इसी अवधि के बाद बंद की है। 300 करोड़ का भार पड़ेगा सरकार पर- इस फैसले के बाद सरकार पर लगभग 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। सरकार को वर्कचार्ज लाभ के साथ ही तमाम अन्य लाभ भी कर्मचारियों को देने होंगे। पेंशन में भी सरकार का खासा खर्च होगा।

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