31 डिग्री तापमान में भी शीशे की तरह चमक रही है सरयोलसर झील
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अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में देव स्थली कुल्लू जिले में तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, लेकिन बर्फ से जमी 10280 फीट ऊंचाई पर स्थित सरयोलसर झील अभी भी शीशे की तरह चमक रही है। झील की ऊपरी सतह करीब 15 सेंटीमीटर तक जमी है।
एक हफ्ते पहले मौसम खुलने के बाद माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर झील सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। मौसम खुलते ही घाटी में पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है।
इससे जलोड़ी दर्रा की पर्यटन गतिविधियां भी शुरू होने लगी हैं। तीस साल बाद हुई रिकॉर्ड बर्फबारी से सरयोलसर झील शीशे की तरह जमी हुई है। कुल्लू-मनाली के साथ जलोड़ी दर्रा, सोझा, रघुपुरगढ़ में भी सैलानी पहुंच रहे हैं।
दूर-दूर से लोग माता बूढ़ी नागिन के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। सरयोलसर झील माता की एक किमी की परिधि तक फैली है। धूल खिलने पर झील शीशे की तरह चमक रही है। ट्रेवल एजेंसी हिमालयन के संचालक मोहन ठाकुर ने कहा कि वह वंदना ठाकुर, दिल्ली से आए जितेंद्र और ललिता के साथ सरयोलसर घूमने गए थे।
झील पूरी तरह से जमी हुई है। माता के भक्त भी सरयोलसर पहुंचना शुरू हो गए हैं। माता के कारदार भागे राणा ने कहा कि इस साल जलोड़ी दर्रा और सरयोलसर घूमने आने वाले सैलानियों को करीब तीन दशक बाद मई माह तक बर्फ देखने को मिलेगी।
बैसाख संक्रांति से शुरू होगी माता की पूजा
सरयोलसर झील में सुबह और शाम के तापमान में गिरावट होने से बैसाख संक्रांति से माता बूढ़ी नागिन की नियमित पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद पुजारी नियमित रूप से रहेंगे। कारदार भागे राम राणा ने कहा कि देव परंपरा के तहत 14 अप्रैल को बैसाख संक्रांति से माता की पूजा शुरू होगी।