कृषि भूमि बेचने को हिंदू परिवारों में वारिसों की सहमति जरूरी
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 कृषि भूमि पर भी लागू होगी। धारा 22 के अनुसार संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति का बंटवारा होने से पहले यदि उत्तराधिकार में मिली संपत्ति को कोई एक सदस्य बेचना चाहे तो अन्य वारिस उस संपत्ति को खरीदने का दावा प्राथमिकता पर कर सकते हैं। यानी संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने से पहले अन्य वारिसों की सहमति जरूरी होगी। इस व्यवस्था से पहले कृषि भूमि को हिस्सेदार किसी अन्य खरीदार को दूसरे हिस्सेदार से बिना पूछे बेच सकता था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि हिंदू सक्सेशन एक्ट के प्रावधान कृषि भूमि से जुड़े विवादों पर भी लागू होंगे। पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने दो विरोधाभासी एकल पीठों के निर्णयों पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए यह निर्णय सुनाया था। इस फैसले के आधार पर न्यायाधीश सीबी बारोवालिया ने 7 मई 2018 को बाबूराम की अपील खारिज करते इस व्यवस्था को उचित ठहराया था। बाबू राम ने सुप्रीमकोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।