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Shimla News: जिले के स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा स्थायी बाजार
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क्लस्टर स्तर पर बनेंगे उत्पाद हट, स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए बनेंगे सेल आउट हट
हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को मिलेगा बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में अब स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा। इस पहल के तहत क्लस्टर स्तर पर सेल आउट हट स्थापित किए जाएंगे। इन हटों में प्रसिद्ध स्थानीय हस्तनिर्मित ऊनी वस्त्र, बांस और लकड़ी के हस्तशिल्प तथा अन्य पारंपरिक उत्पादों की बिक्री की जाएगी।
यह कदम स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के लिए एक सुनिश्चित मंच प्रदान करेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और स्थानीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इन सेल आउट हट में शिमला के प्रसिद्ध स्थानीय उत्पाद जैसे सेब से बने मूल्यवर्धित उत्पाद (जैम, जूस, स्क्वैश, सिरका), राजमा, लाल चावल, हिमाचली देसी घी, शहद, अचार, चटनी, बुरांश स्क्वैश, मशरूम उत्पाद, अखरोट, प्लम, खुबानी, स्थानीय दालें, ऊनी शॉल, टोपी, मफलर, हस्तनिर्मित ऊनी वस्त्र, बांस एवं लकड़ी के हस्तशिल्प सहित अन्य पारंपरिक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। यह निर्णय उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में आयोजित बैठक में लिया गया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। प्रत्येक क्लस्टर अपने क्षेत्र के उत्कृष्ट और विशिष्ट उत्पादों की बिक्री इन हटों के माध्यम से करेगा। इस पहल से स्वयं सहायता समूहों के साथ स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि आधारित उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा। परियोजना के तहत प्रत्येक हट के साथ फूड वैन भी स्थापित की जाएगी, जहां स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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मानकों का होगा पूर्ण पालन
डीसी ने कहा कि सभी फूड वैन में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन शिमला के स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने और ब्रांड शिमला स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। यह पहल स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जिले की पारंपरिक विरासत और स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को मिलेगा बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में अब स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा। इस पहल के तहत क्लस्टर स्तर पर सेल आउट हट स्थापित किए जाएंगे। इन हटों में प्रसिद्ध स्थानीय हस्तनिर्मित ऊनी वस्त्र, बांस और लकड़ी के हस्तशिल्प तथा अन्य पारंपरिक उत्पादों की बिक्री की जाएगी।
यह कदम स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के लिए एक सुनिश्चित मंच प्रदान करेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और स्थानीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इन सेल आउट हट में शिमला के प्रसिद्ध स्थानीय उत्पाद जैसे सेब से बने मूल्यवर्धित उत्पाद (जैम, जूस, स्क्वैश, सिरका), राजमा, लाल चावल, हिमाचली देसी घी, शहद, अचार, चटनी, बुरांश स्क्वैश, मशरूम उत्पाद, अखरोट, प्लम, खुबानी, स्थानीय दालें, ऊनी शॉल, टोपी, मफलर, हस्तनिर्मित ऊनी वस्त्र, बांस एवं लकड़ी के हस्तशिल्प सहित अन्य पारंपरिक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। यह निर्णय उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में आयोजित बैठक में लिया गया।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। प्रत्येक क्लस्टर अपने क्षेत्र के उत्कृष्ट और विशिष्ट उत्पादों की बिक्री इन हटों के माध्यम से करेगा। इस पहल से स्वयं सहायता समूहों के साथ स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि आधारित उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा। परियोजना के तहत प्रत्येक हट के साथ फूड वैन भी स्थापित की जाएगी, जहां स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाए जाएंगे।
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मानकों का होगा पूर्ण पालन
डीसी ने कहा कि सभी फूड वैन में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन शिमला के स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने और ब्रांड शिमला स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। यह पहल स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जिले की पारंपरिक विरासत और स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।