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Kargil Vijay Diwas: कैप्टन विक्रम बत्रा की बहन बोलीं, 23 साल हो गए, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वह हमारे साथ नहीं
Wed, 27 Jul 2022 06:20 AM IST
विजय पुंडीर
एएनआई, शिमला
एएनआई, शिमला
Published by: विजय पुंडीर
Updated Wed, 27 Jul 2022 06:20 AM IST
सार
सीमा बत्रा सेठी ने अपने भाई विक्रम बत्रा को याद करते हुए कहा कि वह बहुत प्यार करने वाले और जिम्मेदार थे। 23 साल हो गए लेकिन अभी भी ऐसा नहीं लगता कि वह हमारे साथ नहीं हैं।
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शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की बहन सीमा बत्रा सेठी
- फोटो : ANI
विस्तार
कारगिल विजय दिवस पर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की बहन सीमा बत्रा सेठी ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले वीरों को हम हमेशा याद करते हैं। उन्होंने अपने भाई विक्रम बत्रा को याद करते हुए कहा कि वह बहुत प्यार करने वाले और जिम्मेदार थे। 23 साल हो गए लेकिन अभी भी ऐसा नहीं लगता कि वह हमारे साथ नहीं हैं।
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शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के परिजनों का फिर छलका दर्द
दूसरी ओर कारगिल विजय दिवस की 23वीं वर्षगांठ पर शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के परिजनों का दर्द फिर छलक गया। कैप्टन कालिया के पिता डॉ. एनके कालिया ने कहा कि जिस दिन बेटे की अमानवीय यातनाओं से हुई शहादत का उन्हें इंसाफ मिल जाएगा, उस दिन सच्चे दिल से कारगिल युद्ध की श्रद्धांजलि होगी।
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हालांकि, वह सभी शहीदों को उनकी शहादत के लिए नमन करते हैं, लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि कारगिल युद्ध में पहली जान देने वाले बेटे की शहादत को लेकर उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला है। कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आस है कि उन्हें न्याय मिलेगा। डॉ. कालिया का कहना है कि विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान से या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मामला सख्ती से उठाना चाहिए।
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नौ जून 1999 को कारगिल युद्ध में बलिदान देने वाले कैप्टन सौरभ कालिया का शरीर पाकिस्तान के सैनिकों ने क्षत विक्षत कर दिया था, जो युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। लिहाजा, बेटे के शरीर की हालत को देखकर परिजनों ने इंसाफ के लिए भारत सरकार के पास मामला उठाया था, लेकिन अफसोस कि पिछले करीब 23 साल बीत जाने के बाद भी परिजनों को न्याय नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में चल रहे इस मामले की सुनवाई पिछले करीब तीन साल से नहीं हो पाई है।