राजस्व विभाग के अधिकारियों में मचा हड़कंप, विजिलेंस को किया साफ इंकार
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धारा 118 के तहत जमीन खरीद घोटाले में रिकॉर्ड के लिए सचिवालय में विजिलेंस की लगातार दबिश से राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। इस बीच राजस्व विभाग ने विजिलेंस ब्यूरो को रिकॉर्ड देने से साफ मना कर दिया है। विभाग का कहना है कि पहले राज्य सरकार की अनुमति लेकर आएं, तभी रिकॉर्ड दिया जाएगा।
राजस्व विभाग को अंदेशा है कि रिकॉर्ड गुम भी हो सकता है या फिर फाइलों से कागज इधर-उधर हो सकते हैं। ऐसे में राजस्व विभाग के अधिकारी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। सूत्रों का कहना है कि रिकॉर्ड देने के मामले में राजस्व विभाग ने फाइल चला दी है। हिमाचल में साल 2010 में धारा 118 में जमीन खरीद मामले में विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली का आरोप है। मामले में बीते वीरवार को विजिलेंस टीम ने राज्य सचिवालय में दबिश दी थी।
तीन सदस्यीय टीम ने राजस्व विभाग की शाखा में जाकर रिकॉर्ड मांगा। इससे पहले भी टीम एक बार सचिवालय में दबिश दे चुकी है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक जुटाए गए रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि जमीन खरीदने में 118 की मंजूरी देने के लिए 5 से 10 लाख रुपये तक घूस ली जाती थी। जांच के अनुसार अकेले वर्ष 2010 में ही राजस्व विभाग ने ढाई सौ से ज्यादा मामलों में धारा 118 के तहत अनुमति दे दी।
राजस्व विभाग के मुलाजिम पूछताछ से परेशान
धारा 118 के तहत जमीन खरीद पर अवैध वसूली मामले में सचिवालय में राजस्व विभाग के कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारियों का मानना है कि जब डीसी से 118 की फाइल आती है तो शाखा के कर्मचारी इसे सरकार के समक्ष रखते हैं। छोटे से लेकर बड़े अफसर तक फाइल जाती है। ऐसे में कर्मचारियों से पूछताछ करना ठीक नहीं है।
भ्रष्टाचार मामले में राज्य चुनाव आयुक्त से आज होगी पूछताछ- धारा 118 के तहत गैर हिमाचलियों को प्रदेश में जमीन खरीदने की मंजूरी देने में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में सोमवार को राज्य चुनाव आयुक्त से विजिलेंस पूछताछ करेगी। ब्यूरो ने पिछले दिनों उन्हें सोमवार को मुख्यालय में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया था।
सूत्रों का कहना है कि ब्यूरो की अब तक की पड़ताल में जमीन खरीद की मंजूरी देने के नाम पर रकम मांगने की पुष्टि हुई है। कुछ सरकारी गवाहों ने जो तथ्य सामने रखे हैं, उनसे और ब्यूरो के पास मौजूद फोन कॉल रिकार्डिंग के तथ्यों का मिलान किया जा रहा है। साल 2010 में मित्रा के प्रधान सचिव राजस्व रहने के दौरान एक ही साल के अंदर करीब ढाई सौ से ज्यादा लोगों को 118 के तहत मंजूरी दे दी गई थी।