धारा 118 : वरिष्ठ नेताओं का नाम आने पर उलझी विजिलेंस जांच
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साल 2010 में एक ही साल के अंदर धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की ढाई सौ से ज्यादा मंजूरी देने और कथित तौर पर भ्रष्टाचार के मामले की विजिलेंस जांच अब उलझ गई है।
बीते सोमवार को राज्य चुनाव आयुक्त पी मित्रा से पूछताछ के बाद विजिलेंस ने दो बार इस मामले में आरोपी रहे शिमला और चंडीगढ़ के दो व्यापारियों को बुलाया लेकिन एक बार भी पूछताछ नहीं की।
यह तब है जब दोनों व्यापारी खुद अपनी बात रखने के लिए ब्यूरो के चक्कर काट रहे हैं। चूंकि मित्रा ने सीधे तौर पर तत्कालीन सरकार के बड़े ओहदेदारों पर ही ठीकरा फोड़ दिया है। ऐसे में ब्यूरो के लिए यह मामला गले की फांस बनता जा रहा है।
दरअसल, जिस समय का यह मामला है, उस समय भाजपा की ही सरकार थी और मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल थे। चूंकि धारा 118 का हर मामला सरकार के पास अनुमति के लिए भेजा जाता है। ऐसे में मित्रा की दलील ब्यूरो और वर्तमान सरकार की मुश्किल बढ़ा रही है।
सूत्रों की मानें तो अब इस जांच को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर जांच आगे बढ़ी तो ब्यूरो को तत्कालीन सरकार के उन सभी भाजपा नेताओं को भी पूछताछ के लिए बुलाना पड़ेगा जिनके खिलाफ मित्रा व दोनों आरोपी व्यापारी आरोप लगा रहे हैं।