आग बुझाने वाले सिलिंडरों को रिफिल करने के नाम पर लाखों की लूट
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प्रदेश भर में आग बुझाने वाले सिलिंडरों को रिफिल करने के नाम पर लाखों की लूट कंपनियां कर रही हैं। आग बुझाने के सिलिंडरों की एक्सपायरी डेट को लेकर सिलिंडर भरने वाली कंपनियां उपभोक्ताओं को गुमराह कर यह लूट कर रही हैं।
जबकि हकीकत में न तो गैस एक्सपायर होती है और न ही केमिकल में कोई खराबी आती है। बावजूद सरकारी इमारतों सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाले आग बुझाने के सिलिंडरों पर एक वर्ष की एक्सपायरी डेट अंकित की जा रही है।
आग बुझाने वाले सिलिंडरों में भरी जाने वाली कार्बन डाइआक्साइड गैस और केमिकल एक्सपायर नहीं होता है, बल्कि इसकी सिर्फ मात्रा ही कुछ हद तक कम होती है। ऐसे में सिलिंडर रिफिल करने वाली कंपनियां हर वर्ष इन सिलिंडरों पर एक्सपायरी तिथि का लेबल चस्पां कर रही हैं।
हकीकत से अनजान उपभोक्ता हर वर्ष सैकड़ों रुपये कंपनियों के पास लुटाने को मजबूर हो रहे हैं। अग्निशमन विभाग के अनुसार सीओ-2 सिलिंडरों में कार्बन डाइआक्साइड गैस भरी जाती है। सीओ-2 के सिलिंडरों को करीब पांच वर्ष तक प्रयोग किया जा सकता है। वहीं केमिकल वाले सिलिंडरों को 18 माह तक प्रयोग में लाया जा सकता है।
इसके बाद इन सिलिंडरों में भरी गैस और केमिकल का भार चेक कर इसे रिफिल किया जा सकता है। अगर गैस साढ़े चार किलोग्राम से कम पाई जाती है तो सिलिंडर को गैस और केमिकल के लेबल तक भरा जा सकता है, जबकि इस पर हर साल लगने वाले एक्सपायरी के लेबल मात्र उपभोक्ताओं से पैसे ऐंठने का जरिया है।
आग बुझाने के लिए गैस और केमिकल युक्त सिलिंडरों को 18 माह से लेकर पांच साल तक प्रयोग में लाया जा सकता है। इन सिलिंडरों को रिफिल करने वाली कुछ कंपनियां लोगों को गुमराह कर इन पर हर साल बाद एक्सपायरी होने का लेबल लगा रही हैं, जो गलत है। - एसके चौधरी, फायर आफिसर, धर्मशाला