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एससीए चुनावः शपथ लेते ही थमाया इस्तीफा

Thu, 25 Sep 2014 09:05 AM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 09:05 AM IST
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sca election: sca resign at hpu.

हिमाचल विश्वविद्यालय और प्रदेश के कॉलेजों में मेरिट आधार पर एससीए का मनोनयन किया गया। मगर एससीए चुनने के चंद घंटे बाद ही नव निर्वाचित पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया।

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एचपीयू में पहली बार मनोनयन से बनी एससीए की अध्यक्ष ज्योति शर्मा, महासचिव दामिनी जिन्हा और सह सचिव पल्लवी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उपाध्यक्ष प्रीति मनोनयन से खुश हैं। ऐसे में एचपीयू में मनोनयन से एससीए चुनने का फार्मूला फेल होता दिख रहा है। इस्तीफे देने के बाद टॉपर्स ने इसके पीछे एससीए गठन की प्रणाली के फार्मूले को लेकर सवाल उठाए।
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साथ ही उन्हें विश्वास में लिए बगैर उनका मनोनयन करने को गलत बताया। ‘अमर उजाला’ पहले ही मनोनयन से एससीए के गठन की प्रणाली पर सवाल उठा चुका है। सर्वे में मेरिट में आने वाले छात्रों को एससीए में थोपी जा रही जिम्मेदारी को लेकर नब्ज टटोल चुका है।
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चुनते ही दिया इस्तीफा

sca election: sca resign at hpu.

मनोनयन से बनी एससीए में बॉयोसाइंस तृतीय सत्र की ज्योति शर्मा (80.5) अध्यक्ष, गणित विभाग की प्रीति देवी (79.20) उपाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग प्रथम सत्र की छात्रा दामिनी जिन्हा (90.42) महासचिव और केमिस्ट्री विभाग की पल्लवी (88.9) को सह सचिव मनोनीत किया गया।

वहीं, 77 छात्रों की जंबो कार्यकारिणी भी बनाई गई है। मनोनयन के बाद पदाधिकारियों को शपथ दिलाई जाएगी। मगर इसके बाद ड्रामा शुरू हो गया। मनोनीत एससीए में मुख्य चार पदों में से तीन पर मेरिट आधार पर चुनी गई छात्राओं ने पद से इस्तीफा दे दिया।

इन्होंने इस्तीफा देने के पीछे विश्वास में लिए बगैर जिम्मदार थोपने और प्रदेश भर में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में यह पद छोड़ने की बात कही है।

अनुशासन नहीं तो एससीए चुनाव भी नहीं

sca election: sca resign at hpu.

उधर, एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय और इन संस्थानों में अनुशासन कायम नहीं होता, तक तक चुनाव नहीं करवाए जा सकते। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती तत्व अकादमिक वातावरण खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि अधिकतर विद्यार्थी कक्षाओं में उपस्थित रहने के हक में हैं।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उन कुछ राज्यों में एक है, जहां लड़कियों से स्नातक स्तर की पढ़ाई तक कोई फीस नहीं ली जाती है। स्नात्तकोत्तर स्तर पर भी होस्टल फीस मिलाकर बहुत ही कम शुल्क है।

उन्होंने कहा कि वह इस तरह की छात्र राजनीति से आहत हैं, जहां कुछ छात्र राजनीतिक संगठन विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में अकादमिक वातावरण को खराब कर रहे हैं।

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