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वीरभद्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी

Thu, 05 Nov 2015 10:22 PM IST
Updated Thu, 05 Nov 2015 10:22 PM IST
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SC transfers from Himachal Pradesh High Court to Delhi HC the plea of Chief Minister Virbhadra Singh in a corruption case.

हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'न्याय के मंदिर को जलील होने से बचाने और न्यायपालिका की आलोचना को रोकने के लिए इस केस को दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर करना जरूरी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को सुनवाई की।

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जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने मामले की सुनवाई की। इससे पहले सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कहा कि हिमाचल के हाईकोर्ट के जज जिन्होंने सीएम और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है वे सीएम के वकील रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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इस पर जस्टिस कलीफुल्ला ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोर्ट पर इस तरह की टिप्पणी न की जाए। मुख्यमंत्री वीरभद्र की ओर से इस मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी की कि सीबाआई के इस जबाव से यह प्रतीत होता है कि हिमाचल की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने खारिज की सिब्‍बल की दलील

SC transfers from Himachal Pradesh High Court to Delhi HC the plea of Chief Minister Virbhadra Singh in a corruption case.

सिब्‍बल ने कहा कि इससे न्यायपालिका के खिलाफ समाज में गलत संदेश जा रहा है। लेकिन कोर्ट ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की साख को बचाने के लिए इस मामले को दिल्‍ली हाईकोर्ट ट्रांसफर किया जाता है। वहीं कोर्ट ने सीएम वीरभद्र और उनकी पत्‍नी की गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखी है।

वहीं सीबीआई की ओर से सीएम और उनकी से पूछताछ से संबंधित याचिका पर भी अब दिल्‍ली हाईकोर्ट ही फैसला देगा। गौर हो कि 1 अक्‍तूबर को हिमाचल हाईकोर्ट ने सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि इस मामले कोई भी फैसला लेने से पहले कोर्ट की अनुमति ली जाए।

वहीं कोर्ट ने यह भी कहा था कि सीबीआई अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट से अनुमति लिए बिना तैयार नहीं करेगी। गौर हो कि याचिका में आरोप है कि यूपीए में 2009 में बतौर केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान वीरभद्र सिंह ने 6 करोड़ से ज्यादा संपत्ति एकत्रित की थी।

वीरभद्र केस की टाइमलाइन

SC transfers from Himachal Pradesh High Court to Delhi HC the plea of Chief Minister Virbhadra Singh in a corruption case.

23 सितंबर- सीबीआई ने वीरभद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
26 सितंबर- सीबीआई की टीम ने वीरभद्र के शिमला और रामुपर ‌स्थित घरों सहित 11 ठिकानों पर दबिश दी।
30 सितंबर- वीरभद्र ने एफआईआर रद्द करने के लिए हिमाचल हाईकोर्ट में चाचिका दायर की।
1 अक्तूबर- हिमाचल हाईकोर्ट ने वीरभद्र की गिरफ्तारी पर रोक लगाई।
15 अक्तूबर- वीरभद्र से पूछताछ करने के लिए सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
26 अक्तूबर- सुप्रीम कोर्ट ने वीरभद्र और उनकी पत्‍नी को नोटिस जारी कर जबाव दायर करने को कहा।
5 नवंबर- सुप्रीम कोर्ट ने केस को दिल्‍ली हाईकोर्ट ट्रांसफर किया।

वीरभद्र ने सीबीआई के खिलाफ दायर की अर्जी

SC transfers from Himachal Pradesh High Court to Delhi HC the plea of Chief Minister Virbhadra Singh in a corruption case.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सीबीआई पर अपने खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत में एफआईआर की पूरी कॉपी नहीं जमा करने का आरोप लगाया है। सीएम की इस अर्जी पर शुक्रवार को विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई होगी। विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष प्रस्तुत अर्जी में वीरभद्र सिंह ने कहा है कि केंद्रीय एजेंसी को एफआईआर की पूरी कॉपी कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया जाए।

सीबीआई ने मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के खिलाफ प्रारंभिक जांच पंजीकृत की थी, जिसे बाद में रेगुलर केस में तब्दील कर दिया गया। एजेंसी का आरोप है कि सीएम और उनके परिवार ने 6.1 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्ति 2009-11 की अवधि में उनकी घोषित आय से अधिक है। इस अवधि में वीरभद्र केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार में इस्पात मंत्री थे।

सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान व चुन्नी लाल चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत नामजद एफआईआर दर्ज की है। एजेंसी का दावा है कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए वीरभद्र ने अपने और अपने परिवार के लोगों के नाम पर चौहान के जरिये एलआईसी पॉलिसी में 6.1 करोड़ रुपये निवेश किए।

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