भितरघात के बीच संजय अवस्थी ने अर्की में संभाली वीरभद्र सिंह की विरासत
2012 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडने वाले संजय अवस्थी के लिए इस बार जीत का सूखा खत्म हुआ। माना जा रहा है कि अर्की में मतदाताओं तक अवस्थी की सीधी पहुंच कांग्रेस को जीत की ओर ले गई।
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पार्टी में भितरघात के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी ने हिमाचल प्रदेश के अर्की में जीत का परचम लहरा दिया। उन्होंने 30 हजार 493 मत हासिल कर विधायक के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की विरासत संभाली। हालांकि इस बार के उपचुनाव में कांग्रेस की मत प्रतिशतता पिछले चुनाव के मुकाबले जरूर गिरी है। 2012 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडने वाले संजय अवस्थी के लिए इस बार जीत का सूखा खत्म हुआ। माना जा रहा है कि अर्की में मतदाताओं तक अवस्थी की सीधी पहुंच कांग्रेस को जीत की ओर ले गई। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद उनको लेकर लोगों की सहानुभूति भी कांग्रेस की जीत में एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दे भाजपा पर भारी पड़ गए। महंगाई और विस क्षेत्र के लिए सरकारी स्तर पर अधूरी घोषणाओं के चलते मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी रत्नपाल को झटका दे दिया। सुबह लगभग आठ बजे शुरू हुई मतगणना में संजय अवस्थी पहले राउंड में ही लीड ले गए जो अंतिम 26वें राउंड तक बढ़ती गई। कांग्रेस में टिकट के दावेदार राजेंद्र ठाकुर और उनके समर्थकों ने खुले तौर पर बगावत का झंडा उठा लिया था।
राजेंद्र से जुड़े कई पूर्व पदाधिकारियों ने सीएम की कुनिहार में रैली के दौरान मंच पर समर्थन का एलान किया था। बावजूद संजय अवस्थी ने इन चुनौतियों से पार पाते हुए विधानसभा चुनाव की दहलीज पर की। दूसरी ओर भाजपा के पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा भी बगावती तेवर दिखा रहे थे। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद वह मौन हो गए और मंडी में पार्टी का प्रचार किया। बहरहाल, कांग्रेस अर्की में अपना दुर्ग बचाने में कामयाब हुई है।
वीरभद्र के मुकाबले अवस्थी को कम पड़े वोट
संजय अवस्थी को वीरभद्र सिंह के मुकाबले में 4006 मत कम मिले। इसी तरह भाजपा को भी पिछले चुनाव के मुकाबले में कम वोट पड़े। पिछली मर्तबा वीरभद्र सिंह 34499 वोट हासिल कर अर्की से विजयी रहे थे, जबकि भाजपा के रत्नपाल की उस वक़्त 28 हजार 448 वोट पड़े थे। जो इस बार सिमट कर 27 हजार 216 रह गए।