बोलने और सुनने में असमर्थ दिव्यांग सलिल ने कायम की मिसाल, हर कोई कर रहा तारीफ
मन में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। अपने हुनर से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। फिर चाहे कोई भी कठिनाई सामने क्यों न आए, सबकुछ संभव हो जाता है। ऐसा ही कर दिखाया है जोगिंद्रनगर के सलिल सूद ने। बोलने और सुनने में शत-प्रतिशत अक्षम सलिल ने मेहनत के बलबूते पर सरकारी क्षेत्र में नौकरी हासिल की है।
26 वर्ष की उम्र में उन्होंने जूनियर ऑफिसर का पद हासिल किया है। राजीव गांधी इंजीनियर कॉलेज नगरोटा में बतौर जूनियर ऑफिसर असिस्टेंट का कार्यभार संभाला है। वह शहर के प्रमुख व्यवसायी स्वर्गीय लाला बूटा राम सूद के पौत्र हैं। उन्होंने कंप्यूटर डिप्लोमा और बीसीए की डिग्री में अच्छे अंकों से हासिल की है। तीन वर्ष तक निजी सेक्टर में सेवाएं देने के बाद अब सरकारी क्षेत्र में सेवाएं देंगे।
सलिल की माता सारिका सूद ने बताया कि सलिल जन्म के कुछ ही समय के बाद बीमारी की चपेट में आने से बोलने और सुनने में असमर्थ हो गया था। मां ने बेटे की अच्छी परवरिश के साथ उसके लिए पहले स्वयं स्पीच थैरेपी सीखी और फिर बेटे को इसी थैरेपी के माध्यम से उच्च शिक्षा हासिल करवाई। दिव्यांग सलिल सूद की जीवन संगिनी भी दिव्यांग हैं।
वह भी पति की तरह बोलने और सुनने में अक्षम हैं। उन्होंने पति को काबिल बनाने में बहुत मेहनत की। प्रदेश की पहली फाइन आर्ट की मास्टर डिग्री हासिल करने वाली अनामिका सूद दिव्यांग पति के लिए हमेशा ढाल बनी रहीं। दिव्यांग अनामिका की ओर से उकेरी गईं कई कलाकृतियां प्रदेश के प्रमुख म्यूजियम में शोभा बढ़ा रही हैं।