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हिमाचल: एशियन पैरा थ्रो बॉल प्रतियोगिता में जसबीर का चयन, श्रीलंका जाने के लिए पैसे नहीं; मदद की उम्मीद
Sun, 20 Sep 2026 10:44 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 20 Sep 2026 10:44 AM IST
सार
सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र के कोटड़ी ब्यास निवासी जसबीर सिंह का चयन एशियन इंटरनेशनल पैरा थ्रो बॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। श्रीलंका में 19 से 23 नवंबर तक होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलने से गांव में खुशी है, लेकिन आर्थिक परेशानी जसबीर के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। वह सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।
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जसबीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
मेहनत, हौसले और खेल के प्रति जुनून के दम पर अपनी पहचान बनाने वाले पांवटा साहिब के जसबीर सिंह ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ग्राम पंचायत कोटड़ी ब्यास निवासी जसबीर सिंह का चयन एशियन इंटरनेशनल पैरा थ्रो बॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता 19 से 23 नवंबर तक श्रीलंका में आयोजित होनी है।
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जसबीर के चयन की खबर से उनके गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलने से जसबीर का वर्षों पुराना सपना पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ा है। लेकिन इस खुशी के बीच उनके सामने आर्थिक परेशानी बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए श्रीलंका जाने और उससे जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए उनके पास पर्याप्त धनराशि नहीं है।
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जसबीर ने बताया कि कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास के बाद उन्हें एशियन इंटरनेशनल पैरा थ्रो बॉल प्रतियोगिता के लिए चुना गया है। वह इस अवसर को देश के लिए पदक जीतने के सपने से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए खेलना बचपन से ही चाहते थे।
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जसबीर इससे पहले भी खेल के क्षेत्र में हिमाचल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह सिटिंग वॉलीबॉल की तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिमाचल की ओर से हिस्सा ले चुके हैं। इन प्रतियोगिताओं के अनुभव के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेलने का अवसर उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
आर्थिक मदद की दरकार
जसबीर का चयन होने के बाद परिवार और ग्रामीणों में उत्साह है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण प्रतियोगिता में भाग लेना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार या प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता मिलती है तो वह श्रीलंका जाकर प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से सहयोग की उम्मीद जताई है। जसबीर का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल प्रतियोगिता में भाग लेना नहीं, बल्कि भारत के लिए पदक जीतकर देश और हिमाचल का नाम रोशन करना है।
पांवटा साहिब के एसडीएम द्विज गोयल ने बताया कि पैरा थ्रो बॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जसबीर सिंह उनसे मिले थे। उन्होंने कहा कि जसबीर को हरसंभव सहयोग उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।
चुनौतियों के बीच नहीं छोड़ा हौसला
जसबीर सिंह ने कई तरह की शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला नहीं छोड़ा। लगातार मेहनत और संघर्ष के दम पर उन्होंने खेल जगत में अपनी पहचान बनाई है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।
जसबीर के लिए यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साबित करने का मौका भी है। उनका सपना है कि वह श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में भारत के लिए खेलें और पदक जीतकर वापस लौटें।
अब जसबीर की नजर सरकार और प्रशासन से मिलने वाली संभावित आर्थिक सहायता पर है। यदि यात्रा और प्रतियोगिता से जुड़े खर्चों के लिए आवश्यक सहयोग मिलता है तो वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने सपने को नई उड़ान दे सकते हैं।
जसबीर की कहानी यह भी बताती है कि खेल प्रतिभा केवल बड़े शहरों या सुविधाओं से लैस संस्थानों तक सीमित नहीं है। छोटे गांवों से निकलने वाले खिलाड़ी भी मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं। जरूरत है तो उन्हें समय पर उचित सहयोग और अवसर मिलने की।
जसबीर सिंह ने कई तरह की शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला नहीं छोड़ा। लगातार मेहनत और संघर्ष के दम पर उन्होंने खेल जगत में अपनी पहचान बनाई है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।
जसबीर के लिए यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साबित करने का मौका भी है। उनका सपना है कि वह श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में भारत के लिए खेलें और पदक जीतकर वापस लौटें।
अब जसबीर की नजर सरकार और प्रशासन से मिलने वाली संभावित आर्थिक सहायता पर है। यदि यात्रा और प्रतियोगिता से जुड़े खर्चों के लिए आवश्यक सहयोग मिलता है तो वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने सपने को नई उड़ान दे सकते हैं।
जसबीर की कहानी यह भी बताती है कि खेल प्रतिभा केवल बड़े शहरों या सुविधाओं से लैस संस्थानों तक सीमित नहीं है। छोटे गांवों से निकलने वाले खिलाड़ी भी मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं। जरूरत है तो उन्हें समय पर उचित सहयोग और अवसर मिलने की।