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एसटीपी के वर्करों को अब सैहब सोसायटी की तर्ज पर मिलेगा वेतन
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शिमला। शहर के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) में कार्य करने वाले मजदूरों को अब वेतन सैहब सोसायटी की तर्ज पर मिलेगा। सोमवार को एसटीपी कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन संबंधित सीटू के प्रतिनिधिमंडल ने महापौर से मुलाकात की। इस दौरान एसटीपी वर्करों ने अपनी समस्याओं को महापौर के समक्ष रखा। इसके बाद महापौर कुसुम सदरेट ने सैहब सोसायटी के तहत काम कर रहे मजदूरों की तर्ज पर एसटीपी कांट्रेक्ट वर्करों को मानदेय देने पर सहमति व्यक्त की।
राजधानी शिमला के ढली, मल्याणा, लालपानी, समरहिल, बरमू और गोल्छा में एसटीपी के प्लांट हैं। इन प्लांट में करीब 180 मजदूर काम करते हैं। लेकिन लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी न होने से मजदूरों में रोष है। सोमवार को एसटीपी कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन को महापौर ने सैहब सोसायटी की तर्ज पर वेतन देने की सहमति जताई। सीटू राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा और जिला सचिव बाबू राम ने इसकी पुष्टि की है। एसटीपी में सिर्फ सीवरमैनों को सैहब सोसाइटी का वेतन दिया जा रहा है। एसटीपी में अकुशल कर्मियों का वेतन अधिक है जबकि अर्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल का कम है। मजदूर वर्ष 2004 से काम कर रहे हैं। इन्हें श्रम कानून के तहत सुविधा नहीं मिल रही। यूनियन अध्यक्ष दलीप सिंह ने बताया कि इनका ईएसआई और ईपीएफ सुचारु रूप से नहीं कट रहा है।
प्लांट में मिथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फरडाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसें निकलती हैं। इससे श्वास और ब्लड प्रेशर बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। इस लिहाजा से मजदूरों को रिस्क के आधार पर वेतन भी अधिक होना चाहिए। बैठक में सचिव बाबू राम, रंजीव कुठियाला, एसटीपी यूनियन अध्यक्ष दलीप सिंह, महासचिव मदन लाल, राजेंद्र शर्मा, संजय, अनिल, जगदीश, केशव, क्षितिज, टेक चंद, केवल और योगेश मौजूद रहे।
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कंपनी के एमडी को लिखा गया पत्र : महापौर
महापौर कुसुम सदरेट ने बताया कि कंपनी के एमडी धमेंद्र गिल को एसटीपी वर्करों के वेतन बढ़ाने के मामले को लेकर चिट्ठी लिखकर मामला अवगत करवाया है। कर्मचारियों ने जो मांगे सामने रखी हैं वह सभी पत्र में लिखी गई हैं, ताकि इस मामले पर विचार करके आगामी प्रक्रिया शुरू कर सकें।
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राजधानी शिमला के ढली, मल्याणा, लालपानी, समरहिल, बरमू और गोल्छा में एसटीपी के प्लांट हैं। इन प्लांट में करीब 180 मजदूर काम करते हैं। लेकिन लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी न होने से मजदूरों में रोष है। सोमवार को एसटीपी कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन को महापौर ने सैहब सोसायटी की तर्ज पर वेतन देने की सहमति जताई। सीटू राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा और जिला सचिव बाबू राम ने इसकी पुष्टि की है। एसटीपी में सिर्फ सीवरमैनों को सैहब सोसाइटी का वेतन दिया जा रहा है। एसटीपी में अकुशल कर्मियों का वेतन अधिक है जबकि अर्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल का कम है। मजदूर वर्ष 2004 से काम कर रहे हैं। इन्हें श्रम कानून के तहत सुविधा नहीं मिल रही। यूनियन अध्यक्ष दलीप सिंह ने बताया कि इनका ईएसआई और ईपीएफ सुचारु रूप से नहीं कट रहा है।
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प्लांट में मिथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फरडाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसें निकलती हैं। इससे श्वास और ब्लड प्रेशर बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। इस लिहाजा से मजदूरों को रिस्क के आधार पर वेतन भी अधिक होना चाहिए। बैठक में सचिव बाबू राम, रंजीव कुठियाला, एसटीपी यूनियन अध्यक्ष दलीप सिंह, महासचिव मदन लाल, राजेंद्र शर्मा, संजय, अनिल, जगदीश, केशव, क्षितिज, टेक चंद, केवल और योगेश मौजूद रहे।
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कंपनी के एमडी को लिखा गया पत्र : महापौर
महापौर कुसुम सदरेट ने बताया कि कंपनी के एमडी धमेंद्र गिल को एसटीपी वर्करों के वेतन बढ़ाने के मामले को लेकर चिट्ठी लिखकर मामला अवगत करवाया है। कर्मचारियों ने जो मांगे सामने रखी हैं वह सभी पत्र में लिखी गई हैं, ताकि इस मामले पर विचार करके आगामी प्रक्रिया शुरू कर सकें।