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Shimla News: बिना बढ़ोतरी सैहब कर्मियों को वेतन जारी, हड़ताल की धमकी
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हर साल दस फीसदी बढ़ता था पहले वेतन
कर्मचारियों ने सफाई अभियानों का किया बहिष्कार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे सैहब सोसायटी के सैकड़ों कर्मचारियों को तनख्वाह जारी कर दी है। 12 साल में पहली बार कर्मचारियों को बिना बढ़ोतरी के तनख्वाह मिली है। वेतन बढ़ोतरी न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने नगर निगम के सफाई अभियानों का बहिष्कार कर दिया है।
अगले हफ्ते यह कर्मचारी अब बैठक बुलाकर सामूहिक हड़ताल पर फैसला लेंगे। 15 मई से इनकी हड़ताल शुरू हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच शिमला शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो जाएगी। इससे शहर की रैंकिंग पर असर भी पड़ सकता है। शहर में घरों से कूड़ा उठाने का काम सैहब सोसायटी के 800 से ज्यादा कर्मचारी करते हैं। इन्हें साल 2015 से हर साल तनख्वाह में दस फीसदी की बढ़ोतरी मिल रही थी। इस बार शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की अध्यक्षता में हुई सैहब सोसायटी की आम सभा में इनकी सालाना दस फीसदी बढ़ोतरी पर रोक लग गई। फैसला लिया गया कि इन्हें सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर बढ़ने वाले डीए के अनुसार बढ़ोतरी मिलेगी। हालांकि, कर्मचारियों को इस बार यह बढ़ोतरी भी नहीं मिली है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश में पहले ही सरकारी कर्मचारियों को डीए नहीं मिल रहा है। केंद्र और राज्य के डीए में भारी अंतर है। सरकार ने पिछला डीए भी अभी जारी नहीं किया है। ऐसे में उन्हें इस व्यवस्था से नुकसान होगा।
सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि 12 साल में पहली बार नगर निगम ने कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी नहीं दी। इन कर्मचारियों के बलबूते ही नगर निगम स्वच्छता रैंकिंग में टॉप सौ शहरों में भी शामिल हुआ था। अब कर्मचारी निराश हैं। नगर निगम के स्वच्छता अभियानों में कर्मचारी हिस्सा नहीं लेंगे। सिर्फ घरों से कूड़ा उठाने का ही काम करेंगे। जल्द ही बैठक कर 15 मई से हड़ताल पर जाने का फैसला लिया जाएगा।
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कर्मचारियों ने सफाई अभियानों का किया बहिष्कार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे सैहब सोसायटी के सैकड़ों कर्मचारियों को तनख्वाह जारी कर दी है। 12 साल में पहली बार कर्मचारियों को बिना बढ़ोतरी के तनख्वाह मिली है। वेतन बढ़ोतरी न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने नगर निगम के सफाई अभियानों का बहिष्कार कर दिया है।
अगले हफ्ते यह कर्मचारी अब बैठक बुलाकर सामूहिक हड़ताल पर फैसला लेंगे। 15 मई से इनकी हड़ताल शुरू हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच शिमला शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो जाएगी। इससे शहर की रैंकिंग पर असर भी पड़ सकता है। शहर में घरों से कूड़ा उठाने का काम सैहब सोसायटी के 800 से ज्यादा कर्मचारी करते हैं। इन्हें साल 2015 से हर साल तनख्वाह में दस फीसदी की बढ़ोतरी मिल रही थी। इस बार शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की अध्यक्षता में हुई सैहब सोसायटी की आम सभा में इनकी सालाना दस फीसदी बढ़ोतरी पर रोक लग गई। फैसला लिया गया कि इन्हें सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर बढ़ने वाले डीए के अनुसार बढ़ोतरी मिलेगी। हालांकि, कर्मचारियों को इस बार यह बढ़ोतरी भी नहीं मिली है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश में पहले ही सरकारी कर्मचारियों को डीए नहीं मिल रहा है। केंद्र और राज्य के डीए में भारी अंतर है। सरकार ने पिछला डीए भी अभी जारी नहीं किया है। ऐसे में उन्हें इस व्यवस्था से नुकसान होगा।
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सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि 12 साल में पहली बार नगर निगम ने कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी नहीं दी। इन कर्मचारियों के बलबूते ही नगर निगम स्वच्छता रैंकिंग में टॉप सौ शहरों में भी शामिल हुआ था। अब कर्मचारी निराश हैं। नगर निगम के स्वच्छता अभियानों में कर्मचारी हिस्सा नहीं लेंगे। सिर्फ घरों से कूड़ा उठाने का ही काम करेंगे। जल्द ही बैठक कर 15 मई से हड़ताल पर जाने का फैसला लिया जाएगा।
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