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हिमाचल प्रदेश: फेसबुक पर ऑनलाइन स्टोर और मोटे मुनाफे का झांसा, लडभड़ोल के व्यक्ति से 9.63 लाख की साइबर ठगी
Thu, 10 Sep 2026 01:19 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, लडभड़ोल (मंडी)।
संवाद न्यूज एजेंसी, लडभड़ोल (मंडी)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:19 PM IST
सार
लडभड़ोल के रेंस गांव निवासी कुलदीप सिंह से फेसबुक पर ऑनलाइन स्टोर और ई-कॉमर्स बिजनेस में भारी मुनाफे का लालच देकर 9,63,950 रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने पैसे निकालने पर अतिरिक्त शुल्क मांगा, जिससे पीड़ित को ठगी का शक हुआ। जीरो एफआईआर के आधार पर जोगिंद्रनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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साइबर अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फेसबुक पर ऑनलाइन कारोबार शुरू कर अच्छी कमाई का लालच मंडी जिले के लडभड़ोल निवासी एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर संपर्क में आए साइबर ठगों ने ऑनलाइन स्टोर खोलने और कम समय में बड़ा मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर उससे 9 लाख 63 हजार 950 रुपये ठग लिए। ठगी का पता तब चला, जब पीड़ित ने कथित तौर पर कमाई की रकम निकालने की कोशिश की और आरोपियों ने इसके लिए दोबारा पैसे मांगने शुरू कर दिए।
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लडभड़ोल तहसील के रेंस गांव निवासी कुलदीप सिंह ने साइबर पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक फेसबुक पर उनसे 'ई-सेलर शॉप ऑनलाइन स्टोर' के नाम से संपर्क किया गया। इस दौरान सितारा रानी और मीरा रानी नाम की महिलाओं ने उनसे ऑनलाइन बिजनेस में निवेश करने की बात कही।
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पीड़ित को बताया गया कि ई-कॉमर्स से जुड़े इस कारोबार में निवेश करने पर कम समय में अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। भरोसा कायम होने के बाद कुलदीप सिंह ने अलग-अलग चरणों में बताए गए बैंक खातों में पैसे भेजने शुरू कर दिए। देखते ही देखते उनके खाते से कुल 9,63,950 रुपये ट्रांसफर हो गए।
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1,000 डॉलर निकालने पर खुला ठगी का राज
शुरुआत में पीड़ित को सब कुछ सामान्य लगा। ठगों ने उसे ऑनलाइन कारोबार और मुनाफे का भरोसा दिलाए रखा। बाद में जब कुलदीप सिंह ने अपने खाते में दिखाई जा रही कमाई में से 1,000 डॉलर निकालने की कोशिश की तो पूरा मामला संदिग्ध लगने लगा।
रकम निकालने के बजाय आरोपियों ने नई शर्त सामने रख दी। उन्होंने निकासी की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क जमा करने को कहा। बार-बार और पैसे मांगने पर कुलदीप सिंह को शक हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी साइबर पुलिस को दी और शिकायत दर्ज करवाई।
जीरो एफआईआर के बाद जोगिंद्रनगर पुलिस ने दर्ज किया केस
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मंडी से प्राप्त जीरो एफआईआर के आधार पर जोगिंद्रनगर थाना पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अब पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, पैसों के लेन-देन और डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
साइबर टीम जुटी जांच में
एसपी मंडी विनोद कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। साइबर टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और मामले की जांच में जुटी हुई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऑनलाइन निवेश, ई-कॉमर्स कारोबार या कम समय में अधिक मुनाफे के दावों पर बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने से पहले पूरी जानकारी की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग पहले भरोसा जीतते हैं, फिर निवेश या कारोबार के नाम पर रकम ट्रांसफर करवाते हैं और जब पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करता है तो नए-नए शुल्क बताकर उससे और रकम मांगते हैं।
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मंडी से प्राप्त जीरो एफआईआर के आधार पर जोगिंद्रनगर थाना पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अब पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, पैसों के लेन-देन और डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
साइबर टीम जुटी जांच में
एसपी मंडी विनोद कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। साइबर टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और मामले की जांच में जुटी हुई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऑनलाइन निवेश, ई-कॉमर्स कारोबार या कम समय में अधिक मुनाफे के दावों पर बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने से पहले पूरी जानकारी की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग पहले भरोसा जीतते हैं, फिर निवेश या कारोबार के नाम पर रकम ट्रांसफर करवाते हैं और जब पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करता है तो नए-नए शुल्क बताकर उससे और रकम मांगते हैं।