Kangra News: बिलिंग से उड़ान भरने वाले रूस के पैराग्लाइडर पायलट स्टोइको की क्रैश लैंडिंग के दौरान मौत
बीड़ बिलिंग घाटी के बिलिंग स्थित टेक ऑफ पॉइंट से शुक्रवार को फ्री फ्लायर के रूप में उड़ान भरने वाले रूस के 62 वर्षीय पैराग्लाइडर पायलट स्टोइको की क्रैश लैंडिंग के दौरान मौत हो गई है।
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बीड़ बिलिंग घाटी के बिलिंग स्थित टेक ऑफ पॉइंट से शुक्रवार को फ्री फ्लायर के रूप में उड़ान भरने वाले रूस के 62 वर्षीय पैराग्लाइडर पायलट स्टोइको की क्रैश लैंडिंग के दौरान मौत हो गई है। रूस के इस पायलट ने शुक्रवार को उड़ान भरी थी और दोपहर एक बजे के करीब पायलट के क्रैश लैंड के दौरान घायल होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद बीड़ से 20 सदस्यीय बचाव दल को पायलट की लोकेशन की ओर रवाना किया था। बचाव दल के प्रतिनिधि ने बताया कि पायलट क्रैश लैंडिंग के दौरान बुरी तरह घायल हो गया था और उसके सिर और शरीर के अन्य भागों पर गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उसकी मौत हो गई।
बिलिंग से उड़ान भरने वाला यह पायलट पालमपुर के कंडबाड़ी और सपेडु गांव के मध्य ऊंची पहाड़ियों के पिछली तरफ चला गया था। बीड़ से शुक्रवार को गया बचाव दल देर शाम को पायलट की लोकेशन तक पहुंचा और शनिवार सुबह शव वापस लाया जा सका। पायलट 14 अक्तूबर को भारत आया था और पिछले एक सप्ताह से बिलिंग में फ्री फायर के तौर पर उड़ान भर रहा था। एसडीएम देवी चंद ठाकुर ने बताया कि शव पालमपुर अस्पताल में रखा गया है और एंबेसी को सूचना दे दी गई है। गौर हो कि मानवीय परिंदों के साहसिक खेल के इस सीजन में यह तीसरी मौत है। इससे पूर्व लखनऊ का पायलट अपनी जान गंवा चुका है। वर्ष 2003 से लेकर अब तक एक दर्जन देसी-विदेशी पायलट इस खेल में अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अतिरिक्त एक बच्चे सहित चार अन्य लोगों की खेल से जुड़ी अन्य गतिविधियों में मौत हो चुकी है।
छठे दिन भी पोलैंड के पायलट का शव नहीं मिला, सेना की ले रहे मदद
बिलिंग से उड़ान भरने वाले पोलैंड के 70 वर्षीय पायलट कुलाविक के शव को छठे दिन भी घटनास्थल से नहीं निकाला जा सका है। शनिवार को पायलट तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना की मदद ली गई, लेकिन मौसम के अनुकूल न होने पर सफलता नहीं मिल सकी है। अब एनडीआरएफ की टीम और बचाव दल के सदस्य घटनास्थल पर जाने की योजना बना रहे हैं। इस पायलट ने गत सोमवार को बिलिंग से उड़ान भरी थी और धर्मशाला की तरफ जाने पर अनियंत्रित होकर खनियारा की पिछली तरफ 12,000 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ियों के बीच गिर गया था। बुधवार को पायलट की सही लोकेशन का पता चला था। 12,000 मीटर की ऊंचाई पर माइनस तापमान होने के कारण पायलट के शव तक पहुंचना बहुत कठिन है। शुरुआत में दो हेलीकाप्टरों की मदद ली गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। शनिवार को सेना के हेलीकाप्टर की मदद ली गई। दोपहर बाद मौसम के अनुकूल न होने पर सर्च अभियान रोक दिया गया। एसडीएम देवी चंद ठाकुर ने बताया कि अभी तक पायलट के शव तक पहुंचा नहीं जा सका है।