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Shimla News: रोपवे का जाल बिछाने के लिए ड्रोन सर्वे पूरा, अब तैयार होगी डीपीआर
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सीएम बोले-शिमला की तर्ज पर धर्मशाला और मनाली में भी विकसित करेंगे शहरी रोपवे
14.13 किलोमीटर तक होगा शिमला रोपवे परियोजना का विस्तार
1546.40 करोड़ रुपये किए जाएंगे रोपवे पर खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला को जल्द ही यातायात जाम की समस्या से निजात मिलने वाली है। राजधानी में रोपवे का जाल बिछाने के प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, भू-तकनीकी जांच और ईएसआईए की अध्ययन प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 30 जून तक इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि शिमला शहर के लिए यह परियोजना रोप-वे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (आरटीडीसी) के माध्यम से संचालित की जाएगी। कहा कि रज्जू मार्ग (रोप-वे) परिवहन के एक सुविधाजनक, सुरक्षित और पसंदीदा साधन के रूप में उभरा है जो हिमाचल जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तीव्र संपर्क सुविधा प्रदान करने के साथ शहरों को भीड़भाड़ से भी राहत प्रदान करता है। कहा कि पर्यावरण के अनुकूल, स्वच्छ और हरित परिवहन साधन होने के अलावा यह हरित तथा स्वच्छ हिमाचल के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को साकार करने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला रोपवे परियोजना का विस्तार 14.13 किलोमीटर का होगा और यह शहर के विभिन्न स्थानों पर 15 स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल परियोजना लागत लगभग 1546.40 करोड़ रुपये है।
धर्मशाला और मनाली में भी रोपवे की योजना
शिमला शहरी रोपवे परियोजना दुनिया में अपनी तरह की दूसरी और भारत में पहली होगी तथा इससे शिमला शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धर्मशाला और मनाली शहर में इसी तरह की शहरी रोप-वे परियोजनाओं को विकसित करने की योजना बना रही है।
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सैलानियों को होगा फायदा
शिमला की जनसंख्या लगभग 3.08 लाख है और यहां वार्षिक लगभग 40 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। शहर में सड़कें संकरी हैं। पर्यटन सीजन में यहां जाम की परेशानी रहती है। रोप-वे परियोजना शिमला के प्रवेश बिंदु पर यहां आने वाले पर्यटकों को अपने वाहनों को पार्क करने के बाद शिमला की मनोहारी पहाड़ियों की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए दूरगामी सिद्ध होगा।
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14.13 किलोमीटर तक होगा शिमला रोपवे परियोजना का विस्तार
1546.40 करोड़ रुपये किए जाएंगे रोपवे पर खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला को जल्द ही यातायात जाम की समस्या से निजात मिलने वाली है। राजधानी में रोपवे का जाल बिछाने के प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, भू-तकनीकी जांच और ईएसआईए की अध्ययन प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 30 जून तक इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि शिमला शहर के लिए यह परियोजना रोप-वे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (आरटीडीसी) के माध्यम से संचालित की जाएगी। कहा कि रज्जू मार्ग (रोप-वे) परिवहन के एक सुविधाजनक, सुरक्षित और पसंदीदा साधन के रूप में उभरा है जो हिमाचल जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तीव्र संपर्क सुविधा प्रदान करने के साथ शहरों को भीड़भाड़ से भी राहत प्रदान करता है। कहा कि पर्यावरण के अनुकूल, स्वच्छ और हरित परिवहन साधन होने के अलावा यह हरित तथा स्वच्छ हिमाचल के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को साकार करने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला रोपवे परियोजना का विस्तार 14.13 किलोमीटर का होगा और यह शहर के विभिन्न स्थानों पर 15 स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल परियोजना लागत लगभग 1546.40 करोड़ रुपये है।
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धर्मशाला और मनाली में भी रोपवे की योजना
शिमला शहरी रोपवे परियोजना दुनिया में अपनी तरह की दूसरी और भारत में पहली होगी तथा इससे शिमला शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धर्मशाला और मनाली शहर में इसी तरह की शहरी रोप-वे परियोजनाओं को विकसित करने की योजना बना रही है।
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सैलानियों को होगा फायदा
शिमला की जनसंख्या लगभग 3.08 लाख है और यहां वार्षिक लगभग 40 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। शहर में सड़कें संकरी हैं। पर्यटन सीजन में यहां जाम की परेशानी रहती है। रोप-वे परियोजना शिमला के प्रवेश बिंदु पर यहां आने वाले पर्यटकों को अपने वाहनों को पार्क करने के बाद शिमला की मनोहारी पहाड़ियों की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए दूरगामी सिद्ध होगा।