रोहतांग से इस बार जून में ही बर्फ गायब, देश-विदेश के सैलानी हो रहे मायूस
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साल में आठ माह तक बर्फ से लकदक रहने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग में इस बार जून में ही नाममात्र बर्फ दिख रही है। इन दिनों अमूमन यहां तीन से चार फीट तक बर्फ रहती थी, लेकिन इस बार बर्फ न होने से देश-विदेश से आ रहे सैलानी मायूस हो रहे हैं।
एक तो यहां बेहद कम बर्फ है, जो नाममात्र बर्फ है भी, उस पर प्रदूषण से काली परत चढ़ गई। बर्फ देखने के लिए लोग अब बारालाचा दर्रे का रुख कर रहे हैं। रोहतांग में इस बार औसतन आधे से भी कम करीब 10 फीट तक बर्फबारी हुई है।
सामान्य बर्फबारी में भी यहां बर्फ की 25 फीट ऊंची दीवारें दिखती हैं। तापमान में बढ़ोतरी से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। रोहतांग दर्रे में इसका असर देखा जा सकता है। महज एक माह पहले बर्फ से लकदक दर्रा आज बर्फ के बिना सूना पड़ गया है। जो बर्फ बची है, उस पर भी धूल और धुएं की काली परत जम गई है।
बारालाचा दर्रा बना अब सैलानियों की सैरगाह
ऐसे में बर्फ पिघलने की रफ्तार और बढ़ गई है। घाटी के बुजुर्ग दोरजे, कर्म सिंह, डोला राम और टशी छेरिंग का कहना है कि उनके समय में जुलाई तक रोहतांग दर्रा बर्फ से लकदक रहता था। टैक्सी चालक सुरेश और कामी ने बताया कि रोहतांग में अब सैलानी मायूस हो रहे हैं।
केलांग से करीब 71 किलोमीटर दूर लेह के रास्ते में पड़ने वाला 16000 फीट की ऊंचाई पर बारालाचा दर्रा अब सैलानियों की सैरगाह बन गया है। लाहौल होकर रोजाना सैलानी बारालाचा का रुख कर रहे हैं। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि बारालाचा दर्रे को पर्यटन के तौर पर विकसित करने के लिए मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है।