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महासंघ में गुटबाजी हावी, कैसे सुलझ पाएंगे कर्मियों के मसले

Thu, 22 Nov 2018 01:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 22 Nov 2018 01:00 PM IST
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Rift in Himachal Pradesh ArajPatrit karamchari Mahasangh

प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ में गुटबाजी हावी है। ऐसे में प्रदेश के पौने दो लाख सरकारी कर्मचारियों के दर्जनों मसले कैसे सुलझेंगे? अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव नहीं हो पाए हैं। प्रतिनिधियों का चयन न होने से सरकार कैसे संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक बुलाएगी। जयराम सरकार को सत्ता पर आए करीब एक साल हो गया है। हर छह महीने में जेसीसी बैठक बुलाना अनिवार्य है।

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अभी तक सरकार ने एक भी जेसीसी की बैठक नहीं की है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी पांच साल की अवधि में एक बार ही जेसीसी बैठक बुलाई थी। जेसीसी की बैठक में सरकार सभी विभागों के सचिवों और विभागाध्यक्षों को आमंत्रित करती है।
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साथ ही महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी को भी बुलाया जाता है। सरकार के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यही है कि महासंघ किसे कर्मचारियों के प्रतिनिधि के तौर में आमंत्रित करे, क्योंकि महासंघ प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है।

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कर्मचारियों के ये मुद्दे हैं लंबित

राज्य के सरकारी कर्मचारियों के टाइम स्केल, पुरानी पेंशन योजना बहाली, विभिन्न वर्गों के रिक्त पदों को भरने, पदोन्नति के मसले सुलझाने सहित कई अन्य मुद्दे लंबित पड़े हैं। 

अराजपत्रित महासंघ के नेता गुटों में बंटे 
हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेताओं में गुटबाजी हावी है। महासंघ की पूर्व कार्यकारिणी को पहले ही भंग किया जा चुका है। महासंघ की कमान हाथों में लेने को कर्मचारी नेताओं में छटपटाहट है।

महासंघ का एक गुट विनोद कुमार के हाथों में कमान सौंपना चाहता है। दूसरा गुट एनएल ठाकुर को महासंघ की कमान सौंपने को संघर्षरत है। दोनों गुटों ने महासंघ का स्थापन दिवस मंगलवार को अपने स्तर पर अलग-अलग स्थानों में मनाया। 

क्या कहते हैं महासंघ तदर्थ समिति संयोजक
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ तदर्थ समिति संयोजक विनोद कुमार कहते हैं कि महासंघ को एकजुट किया जा रहा है। कर्मचारी ही तय करेंगे कि कर्मचारियों की कमान किसके हाथों में होगी। इसके बाद कर्मचारियों के मसले सुलझाने को जेसीसी बुलाएंगे।

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