वन रैंक वन पैंशन, पूर्व सैनिकों में असंतोष बरकरार
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दिल्ली स्थित जंतर मंतर में पिछले 835 दिनों से धरने पर बैठे हिमाचल के मेजर प्यार चंद राणा कहते हैं कि दोनों दलों ने पूर्व सैनिकों को छला है। केंद्र सरकार ने जो वन रैंक वन पेंशन दिया है, उसके रिव्यू में पांच वर्ष की शर्त थोंप दी है, जिससे एक रैंक पांच पेंशन की स्थिति पैदा हो गई है। उधर कोटे की सरकारी नौकरी में सेना का वरिष्ठतम लाभ खत्म होने से भी पूर्व सैनिकों में नाराजगी है। इन तमाम मामलों पर मंथन कर रहे पूर्व सैनिकों पर सियासी दलों की भी टकटकी लग गई है।
कोटे की नौकरी में वरिष्ठता का लाभ खत्म
साढ़े चार दशक से कोटे की नौकरी में वरिष्ठता और वित्तीय लाभ ले रहे ज्यादातर पूर्व सैनिकों में चुनावों से पहले निराशा का आलम है। वरिष्ठता लाभ खत्म होने से पूर्व सैनिकों में चुनावों से पहले निराशा का आलम है। वरिष्ठता लाभ खत्म होने से सूबे में पूर्व सैनिक परिवारों पर प्रतिकूल असर पड़ना लाजमी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के दौरान पूव सैनिकों के लिहाज से यह सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। प्रदेश सरकार ने इस मामले पर 5 अगस्त को कैबिनेट में डिमोबलाइजड आम्र्ड फोर्सिस पर्सनल रूल को खत्म करने का फैसला लिया था। पूर्व सैनिकों का विरोध मुखर हुआ तो अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के इस फैसले पर रोक लगाकर पूर्व सैनिकों को साधने की कोशिश की। लेकिन हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व सैनिकों को कोई राहत नहीं दी है।
इसलिए बनाया था प्रदेश सरकार ने नियम
पूर्व सैनिकों को पुन: रोजगार में वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने के हिमाचल सरकार ने डेमोबिलिसेड आम्र्ड फोर्स एक्ट 1972 के नियम 5 (1) को केवल इमरजेंसी ऑपरेशन के बाद बिना पेंशन के घर लौटे नॉन पेंशनरों के लिए बनाया था। वर्ष 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में देश की सेना में सैनिकों की संख्या कम होने के चलते कई लोगों को सेना में भर्ती किया गया था। लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद इन्हें बिना पेंशन के घर वापस भेज दिया था। कइयों ने एक वर्ष तो कइयों ने दो से तीन वर्ष तक सेना में नौकरी की थी। इन्हें प्रदेश में पुन: रोजगार देते समय वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिया गया। लेकिन बाद में वोट बैंक की राजनीति के कारण अन्य पूर्व सैनिकों को भी इस तरह के लाभ देते रहे। 15 वर्ष तक सेना की नौकरी करने के बाद पूर्व सैनिकों को पेंशन के अलावा प्रदेश सरकार में भी 15 वर्ष का सेवालाभ मिलता रहा, जिससे सालों से पदोन्नति के इंतजार में बैठे अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए। साथ ही नवनियुक्त कर्मचारी संबंधित विभाग में तैनात कर्मचारी से पदनाम में वरिष्ठ हो गया और वेतन में भी वृद्धि होती रही। जिसे कई कर्मचारियों ने तर्कसंगत नहीं माना।
प्रदेश में पूर्व सैनिकों की यह है स्थिति
सूबे में थल सेना, वायु और नौसेना से कुल 1.12 लाख पूर्व सैनिक हैं। इसके अलावा 940 वॉर विडो हैं। प्रदेश में 33684 वीर नारियां हैं।
इन फैसलों के सहारे कांग्रेस सरकार खेलेगी चुनावी दांव
1.वीरता पुरस्कार की राशि 5000 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की।
2.शहीदों को पूर्व में 3 लाख मिलते थे, जिसे अब 20 लाख रुपये किया।
3.केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को भी सेना के शहीदों के बराबर 20 लाख एक मुश्त आर्थिक सहायता राशि।
4.विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा को एक लाख से बढ़ाकर तीन लाख किया।
5.शहीदों की बेटियों को पूर्व में विवाह के लिए 15 हजार रुपये अनुदान मिलता था, अब 50 हजार रुपये किया।
6.विश्व युद्ध के सैनिकों व विधवाओं की आर्थिक सहायता राशि को 1000 रुपये से 3000 रुपये किया।
7.प्रदेश में सैनिक विश्रामगृहों के रखरखाव व मरम्मत कार्य के लिए 3 करोड़ रुपये दिए।
8.धर्मशाला में 9 करोड़ की लागत से पहला युद्ध संग्राहलय।
9.युद्ध विधवाओं और वीरता पुरस्कार सैनिकों को एचआरटीसी की सेमी डिलक्स और साधारण बसों में निशुल्क यात्रा।
10. सैकड़ों पूर्व सैनिकों को पुलिस, वन, आईपीएच और लोनिवि समेत प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में पुन: रोजगार।
क्या कहते हैं पूर्व सैनिक
1.एक्स सर्विसमेन लीग के सीनियर वाइस चेयरमैन कर्नल एसकेएस चंबियाल का कहना है कि वन रैंक वन पेंशन नहीं बल्कि यह केवल रेशनलिजेशन है। पे-कमिशन से कई तरह की विसंगतियां पैदा होने वाली हैं। जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।
2.सेवानिवृत्त कैप्टन रणजीत सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार ने ओआरओपी को लागू कर पूर्व सैनिकों को राहत पहुंचाई है। लेकिन प्रदेश सरकार के मुखिया अपने छह बार के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान पूर्व सैनिकों के लिए कुछ नहीं कर पाए। प्रदेश में न तो कारगिल दिवस मनाया जाता है और न ही पूर्व सैनिकों के लिए सम्मान समारोह। डिमोबलाइजड आम्र्ड फोर्सिस पर्सनल रूल को खत्म करने से पूर्व सैनिक काफी आहत हैं।
3.हिप्र सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर एसके वर्मा ने कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलाई गई हैं। पौने पांच वर्ष में सैकड़ों पूर्व सैनिकों को पुन रोजगार दिया गया। शहीदों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता राशि और जवान के शहीद होने पर मिलने वाली सम्मान राशि को कई गुणा बढ़ाया गया है। पहली बार पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के शहीदों को सेना के बराबर राशि मिलने का फैसला लिया गया।
4.हिप्र स्कूल प्रधानाचार्य एवं निरीक्षण अधिकारी एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वर्मा का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल उच्च न्यायालय के उस फैसले को जिसमें डिमोबलाइजड आम्र्ड फोर्सिस पर्सनल रूल 1972 के नियम 5 (1) को असंवैधानिक करार दिया है, को यथावत रखा है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि वरिष्ठता लाभ केवल उन एक्ससर्विसमैन को मिले, जिन्होंने वॉर इमरजेंसी के समय अपने सेवाएं देश केा समर्पित की हैं। प्रदेश में इस नियम को दुरुपयोग होता आया है, जिससे कई कर्मचारी और अधिकारी प्रभावित हुए।
कांग्रेस ने पूर्व सैनिकों को हमेशा छला : धूमल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन की सौगात दी है। उन्होंने ओआरओपी को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था, जिसके बाद 15000 करोड़ रुपये का लाभ पूर्व सैनिकों को मिला है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस सरकार ने हमेशा पूर्व सैनिकों को छला है। अब कैबिनेट में गुपचुप तरीके से वरिष्ठ लाभ को खत्म करने का निर्णय ले लिया गया। धूमल ने कहा कि पूर्व सैनिकों से मिल बैठकर सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कोटे के मुताबिक पूर्व सैनिकों की भर्तियां नहीं हो रही हैं। ना ही प्रदेश सरकार के पास पूरे प्रदेश में पूर्व सैनिकों की कंपाइल सूची है।