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रिसर्च में खुलासा, हिमाचल के इन क्षेत्रों के भूजल में कैंसर फैलाने वाले रसायन

Mon, 19 Feb 2018 11:41 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 19 Feb 2018 11:41 AM IST
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Research study himachal groundwater contains cancer spreading chemicals

हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्रों के भूजल में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां फैलाने वाले विषैले रसायनिक तत्व घुले हुए हैं। इस पानी को पीने से लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

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प्रदेश के दो बड़े संस्थानों के संयुक्त अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। सीएसआईआर पालमपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रिसोर्स टेक्नोलॉजी के हाई अल्टीट्यूड बायोलॉजी डिवीजन और डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों ने यह शोध किया है।
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औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब, धौलाकुआं और पांवटा में इन क्षेत्रों की करीब दो दर्जन बस्तियों से भूजल के कुल 240 नमूने एकत्र किए गए। इनमें एल्युमीनियम, आर्सेनिक, लेड, निकल और सेलेनियम जैसे खतरनाक और विषैले रसायनतय सीमा से ज्यादा पाए गए हैं।
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प्रति लीटर पानी में एल्युमीनियम 193.13, आर्सेनिक 27.35, निकल 54.75, लेड 19.50 और सेलेनियम 16.94 माइक्रोग्राम पाए गए हैं। इन पांचों का स्तर भारतीय स्टैंडर्ड ब्यूरो के मानकों से कहीं ज्यादा है।

क्या हैं कारण

Research study himachal groundwater contains cancer spreading chemicals

भूजल में इन विषैले रासायनिक तत्वों के घुलने के कई कारण पाए गए हैं। इनमें उद्योगों के व्यर्थ पदार्थों की असुरक्षित और अवैज्ञानिक डंपिंग करना है। खेतीबाड़ी में कीटनाशकों का प्रयोग और एक अन्य वजह जियोजेनिक भी है।

यानी भूजल स्तर नीचे जाने से भी ये खतरनाक रसायन पेयजल में घुल रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक प्रदूषक तत्व आर्सेनिक भी तय मात्रा से ज्यादा पाया गया है। इससे लोगों को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। 

शोध में पानी में कई विषैले तत्व पाए गए हैं। उद्योगों से निकलने वाले वेस्ट का ठीक से निस्तारण करने की जरूरत है। पानी के वैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट के बाद ही इसे मुहैया करवाया जाना चाहिए।

अन्य विषैले तत्वों की तरह ही आर्सेनिक का तय मात्रा से ज्यादा पाया जाना खतरनाक है। इससे कारसिनोजेनिक हेल्थ रिस्क यानी कैंसर जैसी बीमारियां होने का जोखिम है। -डॉ. एसके भारद्वाज, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विभाग, डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी

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