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स्नो कवर एरिया को लेकर ताजा अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 10 Jul 2016 12:01 PM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 10 Jul 2016 12:01 PM IST
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research reveals that snow cover area on hills is decreasing every year

छह माह तक कभी बर्फ से ढका रहने वाले हिमाचल के एक चौथाई क्षेत्रफल में अब जलवायु परिवर्तन का सीधा असर पड़ना शुरू हो गया है। वर्ष 2010 से 2014 की अपेक्षा 2015-16 में क्लाइमेट चेंज की वजह से सूबे की छह नदियों की घाटियों में स्नो कवर क्षेत्र में कमी आई है। बर्फबारी भी छह माह के बजाय तीन-चार माह में सिमट गई है।

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अधिकतर घाटियों में नवंबर और अप्रैल माह को छोड़ दिया जाए तो बाकी के चार महीनों में कमी ही दर्ज की गई है। पीक सीजन में भी औसत से कम बर्फबारी हो रही है। स्पीति वैली में तो 2015-16 में जनवरी माह में 50 फीसदी कम बर्फबारी हुई। हिमाचल प्रदेश स्टेट सेंटर ऑन क्लाइमेट चेंज की ओर से हाल ही में किए अध्ययन में यह बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने प्रदेश की चंद्रा, भागा, पिन, स्पीति, बास्पा, जीवा, पार्वती और ब्यास नदी के बेसिनों के स्नो कवर की साल 2015-16 में स्टडी की है।
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स्टेट काउंसिल फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट के तीन वैज्ञानिकों एसएस रंधावा, बीपी राठौर और इशांत राय ने इस पर अध्ययन किया है। स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के इस बदलाव का असर आने वाले दिनों में इन चोटियों से निकलने वाली नदियों और जल स्रोतों पर भी पड़ेगा।
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क्या है रिपोर्ट में

research reveals that snow cover area on hills is decreasing every year

रिपोर्ट के अनुसार चंद्रा, भागा, ब्यास, पार्वती, जीवा, बास्पा और स्पीति नदियों के बेसिनों पर स्नो कवर क्षेत्र में 2010-14 के मुकाबले 2015-16 में कमी पाई गई है। पीर पंजाल की पहाडि़यों के उत्तर के बेसिनों में बर्फीले क्षेत्र में उतनी कमी नहीं आई है जितनी पीर पंजाल के दक्षिण के बेसिनों में आई है।

ब्यास नदी जिसमें पार्वती और जीवा बेसिन भी आते हैं इनमें बर्फ से ढका क्षेत्रफल कुछ कम हुआ है जबकि पार्वती बेसिन में नवंबर महीने में बर्फबारी और बर्फीला क्षेत्रफल कुछ बढ़ा है। वहीं, स्टडी के दौरान ब्यास बेसिन के भुंतर के आसपास के ऊपरी हिस्से में पूरे अवलोकन के समय के दौरान बर्फीले क्षेत्र में 2010-14 की अपेक्षा में कमी दिखी।

नदियों के बेसिन में यह हैं हालात
2015-16 में ब्यास नदी के बेसिन में अक्तूबर महीने में स्नो कवर एरिया 45 प्रतिशत कम हो गया। नवंबर में स्नो कवर एरिया में 10 प्रतिशत, दिसंबर में 39 प्रतिशत, जनवरी में 38 प्रतिशत, फरवरी में 38 प्रतिशत और मार्च व अप्रैल महीने में 27 व 19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

स्पीति बेसिन में भी अक्तूबर महीने में स्नो कवर एरिया में 13 प्रतिशत, नवंबर में 3 प्रतिशत, दिसंबर में 25 प्रतिशत, जनवरी में 50 प्रतिशत, फरवरी में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, रावी नदी के बेसिन में अक्तूबर में 47 प्रतिशत, दिसंबर में 37 प्रतिशत, जनवरी में 38 प्रतिशत, फरवरी में 48 प्रतिशत, मार्च में 38 प्रतिशत और अप्रैल में 21 प्रतिशत स्नो कवर एरिया कम हुआ है। हालांकि, नवंबर में जरूर स्नो कवर एरिया में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

कहीं नवंबर तो कहीं अप्रैल में ही बढ़ा बर्फीला क्षेत्र
स्टडी में यह भी देखने को मिला है कि कुछ बेसिनों में बर्फबारी और बर्फीला क्षेत्र सिर्फ नवंबर के महीने में बढ़ा है। जबकि कुछ बेसिन में अप्रैल में यह बढ़त दर्ज की गई है। बास्पा में जहां नवंबर और अप्रैल महीने में 3 और 6 प्रतिशत बर्फीला क्षेत्रफल बढ़ा। कुछ इसी तरह का ट्रेंड पिन वैली में भी दर्ज किया गया।

यहां भी नवंबर महीने में बर्फीले क्षेत्रफल में 25 फीसदी और अप्रैल महीने में 2 फीसदी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि स्पीति बेसिन में सिर्फ अप्रैल महीने में 10 फीसदी क्षेत्रफल बढ़ा है। इसी तरह चंद्र, भागा, मियर, रावी और पार्वती में सिर्फ नवंबर में 25, 21, 39, 30 और 14 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

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