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शोध में खुलासा: ऊना में 90 प्रतिशत स्कूली बच्चों को पता हैं हर तरह के नशे

Sat, 04 Nov 2023 06:02 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Sat, 04 Nov 2023 06:02 PM IST
सार

ऊना अभियान के तहत 30 स्कूलों में हुए शोध में कई अहम खुलासे हुए हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि 90 फीसदी बच्चों को हर प्रकार के नशे के बारे में जानकारी है। 

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Research revealed: 90 percent school children in Una know about all types of drugs.
उपायुक्त ऊना राघव शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नशामुक्त ऊना अभियान के तहत 30 स्कूलों में हुए शोध में कई अहम खुलासे हुए हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि 90 फीसदी बच्चों को हर प्रकार के नशे के बारे में जानकारी है। 30 प्रतिशत बच्चों ने माना है कि अकेले में दोस्त की ओर से नशे के सेवन के पूछने पर वे कर लेंगे। उपायुक्त राघव शर्मा ने डीआरडीए हाल ऊना में शोध में सामने आए तथ्यों को साझा किया। शोध से पता चला है कि छठी से 12वीं के बीच 54 प्रतिशत बच्चों को चिट्टा यानी हेरोइन के नशे का पता है।

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चरस और गांजा के बारे में 46 प्रतिशत, अल्कोहल 80 फीसदी तो बीड़ी-सिगरेट के नशे के बारे में 96 प्रतिशत बच्चों को पता है। सर्वेक्षण से पता चला है कि सोशल मीडिया से भी बच्चों को नशे के बारे में जानकारी मिल रही है। नशीले पदार्थों की शुरुआत भी इसी उम्र से होती है। किशोर नशे की शुरुआत अकसर देखादेखी में करते हैं। इसमें उनके दोस्तों और आस-पड़ोस के वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वरिष्ठ कक्षाओं में अध्ययनरत छात्रों में हर सातवां किसी न किसी तरह का नशा करता है। 50 फीसदी छात्रों को दोस्तों ने नशा ऑफर किया।
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परिजनों के नशा करने वाले परिवारों में बच्चों का नशा करने का जोखिम दोगुना है। यह भी पता चला है कि किशोरों का भावनात्मक जुड़ाव परिजनों के अपेक्षाकृत दोस्तों से अधिक रहता है। दिलचस्प पहलू यह है कि छोटी कक्षाओं में यह जुड़ाव पिता की अपेक्षा मां से होता है। आयु बढ़ने के साथ दोस्तों के प्रति झुकाव बढ़ता जाता है। राघव शर्मा ने कहा कि नशे से बचाव के लिए शुरुआती हस्तक्षेप जरूरी है। इसके लिए अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इस दिशा में जिला प्रशासन ने आवश्यक कदम बढ़ाते हुए हर घर दस्तक अभियान शुरू किया है। दोस्तों की अहम भूमिका को देखते हुए स्कूल कार्यक्रम किए जा रहे हैं। जहां छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा रहा है।
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भोला नाम के नशे को सुनकर उपायुक्त हैरान
बैठक में नशे पर चोट के लिए चर्चा में सुझाव भी दिए गए। शिक्षण संस्थानों और आबादियों के पास कई दुकानों में बिक रहे भोला नामक नशे की पैकेट का जिक्र सामने आया। इस पर उपायुक्त हैरान हुए, उन्होंने इस संबंध में उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।

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