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Shimla News: एचपीयू से 143 करोड़ के बजट के उपयोग की रिपोर्ट तलब
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विवि को कई मदों के तहत स्वीकृत हुई यह राशि, करोड़ों रुपये का इस्तेमाल नहीं कर पाया है प्रबंधन, देना होगा जवाब
केंद्र से अगली किस्त मिलने में हो सकती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से रूसा-एक, रूसा-दो और पीएम ऊषा योजनाओं के तहत मिली 143 करोड़ रुपये की ग्रांट के उपयोग का पूरा ब्योरा तलब किया है।
सरकार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी है कि विभिन्न मदों में फंड कितना मिला, कितना खर्च हुआ और कितनी राशि अभी तक अप्रयुक्त (बिना इस्तेमाल) पड़ी है। करोड़ों रुपये की राशि का इस्तेमाल न होने पर अभ केंद्र से मिलने अगली किस्त में अड़ंगा लग सकता है। इस संबंध में शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में इस सप्ताह समीक्षा बैठक होगी। एचपीयू को रूसा-एक के तहत करीब 20 करोड़, रूसा-दो में 20 करोड़, पीएम ऊषा योजना में 100 करोड़ तथा इक्विटी इनिशिएटिव के लिए 3 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकृत हुई थी। इनमें से कई परियोजनाओं में प्रगति धीमी है जिसके चलते केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को मार्च तक शेष राशि खर्च करने के निर्देश दिए हैं। तय समय सीमा में राशि का उपयोग न होने की स्थिति में विश्वविद्यालय को अगली किस्त मिलने में दिक्कत हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय ने पीएम ऊषा योजना के तहत मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (मेरू) मॉडल के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करना था। विश्वविद्यालय से इस योजना में शोध कार्य, अधोसंरचना विकास और शैक्षणिक सुधारों से संबंधित प्रस्ताव भेजने को कहा था लेकिन अब तक परियोजनाओं के कार्यान्वयन की रफ्तार काफी धीमी है। सरकार ने विश्वविद्यालय से इस मॉडल पर स्पष्ट और लागू किए जाने वाले प्लान की ताजा स्थिति की जानकारी भी मांगी है। कई विभागों में परियोजनाएं तो स्वीकृत हुईं लेकिन जमीन पर गतिविधियां धीमी हैं। कुछ मदों में खर्च नगण्य दर्ज किया गया है जबकि कुछ हिस्सों में फाइलें लंबित बताई जा रही हैं। सरकार अब यह जानना चाहती है कि मंजूर की गई ग्रांट राशि के बावजूद विश्वविद्यालय फंडों का उपयोग समय पर क्यों नहीं कर सका। समीक्षा बैठक में फंड उपयोग, प्रशासनिक देरी और परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
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केंद्र से अगली किस्त मिलने में हो सकती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से रूसा-एक, रूसा-दो और पीएम ऊषा योजनाओं के तहत मिली 143 करोड़ रुपये की ग्रांट के उपयोग का पूरा ब्योरा तलब किया है।
सरकार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी है कि विभिन्न मदों में फंड कितना मिला, कितना खर्च हुआ और कितनी राशि अभी तक अप्रयुक्त (बिना इस्तेमाल) पड़ी है। करोड़ों रुपये की राशि का इस्तेमाल न होने पर अभ केंद्र से मिलने अगली किस्त में अड़ंगा लग सकता है। इस संबंध में शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में इस सप्ताह समीक्षा बैठक होगी। एचपीयू को रूसा-एक के तहत करीब 20 करोड़, रूसा-दो में 20 करोड़, पीएम ऊषा योजना में 100 करोड़ तथा इक्विटी इनिशिएटिव के लिए 3 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकृत हुई थी। इनमें से कई परियोजनाओं में प्रगति धीमी है जिसके चलते केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को मार्च तक शेष राशि खर्च करने के निर्देश दिए हैं। तय समय सीमा में राशि का उपयोग न होने की स्थिति में विश्वविद्यालय को अगली किस्त मिलने में दिक्कत हो सकती है।
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जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय ने पीएम ऊषा योजना के तहत मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (मेरू) मॉडल के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करना था। विश्वविद्यालय से इस योजना में शोध कार्य, अधोसंरचना विकास और शैक्षणिक सुधारों से संबंधित प्रस्ताव भेजने को कहा था लेकिन अब तक परियोजनाओं के कार्यान्वयन की रफ्तार काफी धीमी है। सरकार ने विश्वविद्यालय से इस मॉडल पर स्पष्ट और लागू किए जाने वाले प्लान की ताजा स्थिति की जानकारी भी मांगी है। कई विभागों में परियोजनाएं तो स्वीकृत हुईं लेकिन जमीन पर गतिविधियां धीमी हैं। कुछ मदों में खर्च नगण्य दर्ज किया गया है जबकि कुछ हिस्सों में फाइलें लंबित बताई जा रही हैं। सरकार अब यह जानना चाहती है कि मंजूर की गई ग्रांट राशि के बावजूद विश्वविद्यालय फंडों का उपयोग समय पर क्यों नहीं कर सका। समीक्षा बैठक में फंड उपयोग, प्रशासनिक देरी और परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
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