पहाड़ में साढ़े तीन साल से नहीं सुनाई दी शेरों की दहाड़
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हिमाचल प्रदेश में लॉयन सफारी का वजूद मिट गया है। बब्बर शेर की दहाड़ से गूंजने वाली रेणुका सफारी अब वीरान है। प्रदेश के अन्य इलाकों में बने चिड़ियाघरों का भी यही हाल है। वीरान पड़ी लॉयन सफारी को जिंदा करने के लिए वन्य प्राणी विभाग ने शेर लाने की कवायद चलाई लेकिन शेरों की उपलब्धता नहीं हो सकी। इसके बाद वन अभ्यारण्य में बाघ (टाइगर) लाने की योजना बनाई गई, जिस पर सेंट्रल जू अथॉरिटी का पेच फंस गया है।
वन्य प्राणी विहार रेणुका में लगभग साढ़े तीन साल पहले शेरों की मृत्यु के बाद से लॉयन सफारी वीरान पड़ी है। हर रोज यहां पहुंचने वाले सैकड़ों सैलानी और श्रद्धालु खाली पिंजरों को देखकर लौट रहे हैं। एक समय ऐसा भी था जब यहां 29 शेर हुआ करते थे। तीन दशकों में यहां शेर बारी-बारी दम तोड़ते गए।
अस्सी के दशक में सिंह विहार के नाम से मशहूर इस लॉयन सफारी में अशोक और गीता नाम के नर एवं मादा लॉयन लाए गए थे। वर्ष 1999 के बाद यहां पर लॉयन के मरने का सिलसिला शुरू हुआ। 29 तक की संख्या पहुंचने के बाद यहां लॉयन बढ़ने के बजाय घटते चले गए। शेरों के मरने की वजह ब्लड रिलेशन एक होना और उम्र बताया गया।
खाली पड़े हैं पिंजरे
इसके बाद से ही रेणुका में बाघ के जोड़ों को लाने की योजना पर काम होने लगा। लेकिन तीन सालों से यह योजना भी लंबित पड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि अब सेंट्रल जू अथॉरिटी की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। वहीं, वन सेंक्चुरी क्षेत्र होने की वजह से भी इसकी अनुमति जरूरी हो गई है।
मार्च 2015 में मादा शेर और अप्रैल 2015 में नर शेर के मरने के बाद से यहां पर वीरानगी छाई हुई है। सबसे आखिर में यहां शिशु नामक शेर की मौत हुई थी। इसके बाद से यहां खाली पिंजरे पड़े हुए हैं। वन्य प्राणी विभाग ने इसके बाद बाघ लाने का प्रस्ताव भेजा।
सात हेक्टेयर में फैली है सफारी
रेणुका की सफारी में सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते थे। उस दौरान यहां पांच रुपये टिकट रखा गया था। लेकिन, अब यहां सिर्फ खाली पिंजरे रह गए हैं। यह सफारी कुल सात हेक्टेयर में फैली हुई है।
वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ राजेश शर्मा ने बताया कि शेरों की उपलब्धता कहीं भी नहीं है। इनके स्थान पर बाघ को लाने की योजना बनाई है। लेकिन, वन सेंक्चुरी का क्षेत्र होने के कारण कई आपत्तियां सामने आई हैं। सेंट्रल जू अथॉरिटी ने पहले वन एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस मांगी है। उसके बाद ही यहां पर बाघ लाए जा सकेंगे।