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'शांता के खिलाफ एक हफ्ते के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए'

Mon, 28 Apr 2014 09:00 PM IST
बयूरो/ अमर उजाला, धर्मशाला
बयूरो/ अमर उजाला, धर्मशाला Updated Mon, 28 Apr 2014 09:00 PM IST
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आप प्रत्याशी डा. राजन सुशांत ने भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार पर संगीन आरोप लगाए हैं। आरोप लगाया कि शांता ने पालमपुर के होल्टा में करोड़ों रुपये की 419 कनाल सरकारी जमीन व जनता के चंदे का दुरुपयोग किया है।

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डॉ. सुशांत ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को शांता कुमार के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। ऐसा न हुआ तो वह एक सप्ताह बाद प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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शांता कुमार ने विवेकानंद मेडिकल, एजूकेशन एंड रिसर्च ट्रस्ट बनाया। शांता ने प्रलोभन दिया कि पालमपुर में चंडीगढ़ पीजीआई स्तर का अस्पताल बनाऊंगा। लोगों ने करीब 20 करोड़ रुपये चंदा दिया, लेकिन असल में शांता ने जनता को झूठा सपना दिखाया।
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मुख्यमंत्री रहते हुए शांता ने 30 अप्रैल 1992 को तीन गड़बड़झाले किए। उन्होंने पहली जून 1991 को जिला कांगड़ा के कलेक्टर के निर्णय को बदलवाया। इसमें निर्णय लिया गया था कि पालमपुर के होल्टा की इस जमीन को किसी विभाग के नाम हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

लेकिन शांता कुमार ने मुख्यमंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए 30 अप्रैल 1992 को पिछला फैसला बदलवाकर स्वास्थ्य विभाग के नाम करवा दिया गया। इसी दिन कुछ ही घंटों में इसे राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया जाता है। साथ ही तहसीलदार द्वारा इसका इंतकाल भी कर दिया जाता है।

इसके अलावा जमीन की किस्म को भी बदल दिया जाता है। चाय बागान जमीन को बंजर करार दिया जाता है, जो सब तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता के दबाव में हुआ। डॉ. सुशांत का आरोप है कि शांता कुमार ने 11 सितंबर 2000 को केंद्रीय मंत्री रहते हुए तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार धूमल पर दबाव डालकर ट्रस्ट का नाम बदलकर विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट रख दिया।

साथ ही सरकारी प्रबंधन समिति को बिना एनओसी बर्खास्त कर दिया गया। इसका चेयरमैन शांता स्वयं बन जाते हैं। जबकि पूर्व में ट्रस्ट के चेयरमैन स्वास्थ्य सचिव व डायरेक्टर, वित्त सचिव व दो अन्य शोधकर्ता इसके सदस्य थे। वहीं ट्रस्ट का सरकारी प्रबंधन हटाने के साथ ही इसे निजी कर दिया गया व जमीन लीज पर ले ली गई।


लीज का उद्देश्य नहीं कर रहे पूरा
शांता कुमार ने तत्काल विवेकानंद मेडिकल ट्रस्ट में सुपर स्पेशलिटी, मेडिकल कॉलेज व रिसर्च सेंटर खोलने का जिक्र कर जमीन लीज पर ली थी, लेकिन 14 साल बीत जाने के बाद भी शांता कुमार एक भी वायदा पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे में सरकार को लीज रद्द कर जमीन वापस लेनी चाहिए।

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