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अब सूखे और बेकार फूल बढ़ाएंगे घर की शोभा
ब्यूरो/अमर उजाला, नौणी (सोलन)
Updated Sun, 28 Jun 2015 10:33 AM IST
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सूखे और बेकार फूल अब रिसाइकल होकर कई वर्षों तक आपके घर की शोभा बढ़ा सकेंगे। यह संभव होगा शुष्क पुष्प उत्पादन विधि से। इस तकनीक में नौणी विवि के पुष्प एवं स्थल सौंदर्य विभाग ने सफलता पाई है। केंद्र सरकार के ‘डिहाइड्रेशन एंड वेल्यू एडिशन ऑफ फ्लावर फोर मेकिंग फ्लोर क्राफ्ट’ प्रोजेक्ट के तहत इस विधि पर कार्य किया गया।
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बेकार फूलों को केमिकल में डुबोने के बाद प्राकृतिक रंगों से पेंट करके माइक्रोवेव में सूखकर तैयार किया जाएगा। बाद में इन्हीं फूलों को सूखी घास के साथ मनमोहक डिजाइनों के गुलदस्ते बनाकर या अन्य रोचक उत्पाद बनाकर मार्केट में उतारा जा सकेगा। ग्रामीणों को इस तकनीक से रूबरू करवाने के लिए नौणी विवि ने कवायद शुरू कर दी है। जल्द ही जिला वार पुष्प उत्पादकों के लिए शिविर शुरू किए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि इस विधि से तैयार फूल तीन से दस साल तक सुरक्षित रह सकते हैं।
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ऐसे तैयार होगा ड्राई फूल- पुष्प एवं स्थल सौंदर्य विभाग के एचओडी डा. वाईसी गुप्ता ने बताया कि इस विधि में फूलों को सुखाने के लिए सिलिका जैल या बोरेक्स का प्रयोग किया जाता है। डा. भारती कश्यप ने बताया कि जिन फूलों का प्राकृतिक रंग अच्छा होता है, उन्हें वार्निश पेंट से लंबे समय तक खराब होने से बचाया जा सकता है।रासायनिक डाई के रंगों में मिथाइलिन ब्लू, ओरेंज और रेड डाई एवं अन्य कई रंगों के डाई उपलब्ध हैं। सबसे सस्ती रंगाई कपड़े रंगने वाले रंगों से होती है।
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ये सूखे फूल हैं प्रचलन में- शुष्क उत्पादन विधि में सबसे अच्छी माइक्रोवेव विधि को माना गया है। इसमें बेहद कम समय में बेहतर नतीजे मिलते हैं। इन दिनों गेंदा, चिंची रिंची, कारनेशन, गुलाब आदि शामिल हैं। वहीं, अन्य फसलों में हिमाचल में तैयार होने वाली हैलीक्राइसम, एक्रोकलाइनम, र्स्टटिस औरिनोथोगेलम, नाइजैला, कमल के फूल, गुलाब के फूल एवं फल, सिलोशिया, स्कैबियोसा, जिप्सोफिला, साइकस के पत्ते, कनहिंगेभिया के कोन, मैगनोलिया के पत्ते और बाटल ब्रश के फल शामिल हैं।
नौणी विवि सोलन के वीसी डा. विजय सिंह ठाकुर ने बताया कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए शुष्क पुष्प उत्पादन का विशेष महत्व है। पॉलीहाउस और ओपन एयर फूल के अलावा फ्लोरिक्राफ्ट के कार्यों को भी विवि ने शुरू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर महिलाओं के लिए यह व्यावसायिक कार्य हो सकता है। विवि इसे प्रोत्साहित कर रहा है। अगर किसी को तकनीकी जानकारी लेनी है तो विवि में संपर्क किया जा सकता है।