रमेश धवाला को कैबिनेट रैंक, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष बने
जयराम सरकार ने आखिरकार वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्री रमेश धवाला को आखिरकार कैबिनेट रैंक का दर्जा दे दिया है। सरकार ने धवाला को राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर तैनाती दी है। नरेंद्र बरागटा के सरकारी मुख्य सचेतक बनने के बाद धवाला अंदरखाते नाराज भी चल रहे थे।
सरकार उन्हें उप सचेतक बनाना चाह रही थी, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया था। धवाला के अलावा एससी-एसटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर चंबा भाजपा के महामंत्री जय सिंह और किसान मोर्चा के राज्य अध्यक्ष बलदेव भंडारी को राज्य कृषि उपज विपणन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले बलदेव भंडारी भाजपा में जमीनी स्तर से जुड़े नेता हैं। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने पार्टी की मजबूती के लिए कार्य किए। भंडारी ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम कैसे मिल सकता है, इसके प्रयास किए जाएंगे। वहीं, तमाम सब्जी मंडियों को ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। किसान और उपभोक्ता के बीच की दूरी को कम करेंगे।
सरकार पर भारी पड़ी धवाला की कूटनीति
सुनील चड्ढा, धर्मशाला। वर्ष 1998 में धूमल सरकार बनाने में तुरुप का पत्ता साबित होने वाले ओबीसी नेता रमेश धवाला की नाराजगी जयराम सरकार पर भारी पड़ गई। धवाला को जयराम कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज ज्वालाजी मंडल भाजपा नेताओं के इस्तीफे और नारेबाजी के सियासी दबाव की राजनीति काम आ गई। ऐसे में धवाला को योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में कैबिनेट रैंक देकर जयराम सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले ओबीसी वोट बैंक को साधकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।
हालांकि, धवाला को पद देने में देरी की वजह से नारेबाजी और इस्तीफों के चलते सरकार की खूब किरकिरी भी हुई। धवाला की ताजपोशी से जहां शांता खेमे को मजबूती मिली, वहीं इस पूरे सियासी प्रकरण के बाद भाजपा संगठन के एक बड़े नेता के बढ़ते सियासी दखल पर थोड़ा विराम भी लगा। इस ताजपोशी से साफ दिखा कि सरवीण चौधरी को कांगड़ा का एकमात्र ओबीसी चेहरा बनाकर धवाला को सियासी हाशिये पर धकेलने का दांव उलटा पड़ गया।
ठुकरा दिया था डिप्टी चीफ व्हिप पद
कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज चल रहे धवाला को जयराम सरकार ने प्रोटेम स्पीकर बनाने और डिप्टी चीफ व्हिप का पद ऑफर कर सियासी संतुलन साधने की कोशिश की थी। लेकिन, धवाला ने इस पद को अस्वीकार कर दिया था। जिला परिषद के उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा को मिली बड़ी हार को भी ओबीसी वोट बैंक की नाराजगी के रूप में देखा जा रहा था।
नूरपुर जिला को नहीं मिला कैबिनेट रैंक
जयराम सरकार ने धवाला के रूप में कांगड़ा जिला को पांचवां कैबिनेट रैंक दिया है। इसमें जातीय समीकरणों को ज्यादा तवज्जो दी गई है। लेकिन, क्षेत्रीय समीकरणों में नूरपुर पीछे रह गया। संगठनात्मक जिला देहरा से भाजपा सरकार में अब दो, कांगड़ा जिला से भी दो मंत्री और पालमपुर जिला से एक कैबिनेट रैंक दिया गया। लेकिन, संगठनात्मक जिला नूरपुर को सरकार में एक भी कैबिनेट रैंक नहीं मिला।