पांवटा साहिब: राकेश टिकैत बोले- संगठन में कोई फूट नहीं, जारी रहेगा किसान आंदोलन
पांवटा पहुंचने पर राकेश टिकैत ने कहा कि देश के करीब 550 संगठन आंदोलन में साथ खड़े हैं। आंदोलन के लिए 40 सदस्यीय कोर कमेटी भी गठित की गई है। हर राज्य के मुद्दे और समस्याओं को केंद्र सरकार के सामने रखा जा रहा है।
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भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती। किसान आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेता ने कहा कि संगठन में कोई फूट नहीं है। देश के हर राज्य में पहुंचकर स्थानीय किसानों-बागवानों की मांगों पर समस्याओं के निराकरण का संघर्ष करते रहेंगे। पांवटा पहुंचने पर टिकैत ने कहा कि देश के करीब 550 संगठन आंदोलन में साथ खड़े हैं। आंदोलन के लिए 40 सदस्यीय कोर कमेटी भी गठित की गई है।
हर राज्य के मुद्दे और समस्याओं को केंद्र सरकार के सामने रखा जा रहा है। सरकार जब आंदोलनकारी किसानों के साथ बात करेगी, तभी बात बनेगी। किसानों और बागवानों की मांगों को आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी की अपनी मांग पर अडिग है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में संगठन को मजबूत किया जा रहा है। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन प्रदेश अध्यक्ष अनिंदर सिंह नौटी, जिलाध्यक्ष हरीराम शास्त्री, इंद्र सिंह राणा, हरप्रीत सिंह, पार्षद डॉ. रोहताश नांगिया, चरनजीत सिंह, हरीश चौधरी, गुरनाम सिंह, प्रदीप, गुरजीत सिंह, परमजीत सिंह मौजूद रहे।
सीएम जयराम को मिल रहीं धमकियां भाजपा आईटी सेल का काम: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा न फहराने को लेकर मिल रही धमकियों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कार्य बीजेपी के आईटी सेल का है। यह बात उन्होंने नाहन में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कही। उन्होंने मोदी सरकार को चेताते हुए कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं होते, तब तक देश का किसान राजधानी दिल्ली को नहीं छोड़ेंगे। हिमाचल के किसान भी इस आंदोलन में हिस्सा लें। यदि देश में बीजेपी सरकार होती तो कृषि कानूनों को लेकर किसानों से बातचीत जरूर करती। न देश के प्रधानमंत्री बात करना चाहते हैं और न कृषि मंत्री।
देश में कंपनी की सरकार चल रही है। उन्होंने हिमाचल के किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल तीन जोन में बंटा हुआ है, जहां पर धान की खेती होती है। गेहूं के साथ-साथ सब्जियों का भी यहां उत्पादन होता है। लिहाजा इन फसलों के क्रय केंद्र में बहुत दिक्कतें हैं। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि एक बाजार कर दिया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले कुछ सुविधाएं ठीक थी, लेकिन नए कृषि कानून के आने के बाद एक राज्य से दूसरे राज्य में फसल ले जाना बेन कर दिया गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला में प्रस्तावित एयरपोर्ट के मामले में किसान नेता ने कहा कि मंडी की एक तलहटी में एयरपोर्ट बनाया जाना प्रस्तावित है। यहां के मुख्यमंत्री का वह क्षेत्र पड़ता है। एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करना है तो उसके रेट भी तय होने चाहिए।