रेल नेटवर्क से चीन सीमा पर मजबूत होगा भारत
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चीन सीमा से सटे क्षेत्र लेह-लद्दाख तक रेल पहुंचाने के लिए रेलवे ने एक कदम बढ़ा दिया है। सामरिक महत्त्व की प्रस्तावित मनाली-लेह रेल लाइन की फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
हिमाचल के बिलासपुर से होते हुए यह रेल ट्रैक चार चरणों में बनेगा। प्रस्तावित भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन को मनाली होते लेह तक पहुंचाने की योजना है। इस रेल लाइन के बनने से न केवल हिमाचल में पर्यटन का विकास होगा बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना को रसद पहुंचाने में भी आसानी होगी।
लेह-लद्दाख तक प्रस्तावित इस रेलवे लाइन को पहले चरण में नंगल, भानुपल्ली होते हुए धरोट तक बनाया जा रहा है। नंगल से सटे हिमाचल के भानुपल्ली से घरोट तक रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए अंतिम सर्वे हो रहा है।
उत्तर रेलवे को सौंपा जिम्मा
उत्तर रेलवे के अधीन कार्यरत रायट्स कारपोरेशन को यह जिम्मा सौंपा गया है। रायट्स के विशेषज्ञ ज्योटेक्निकल रिपोर्ट तैयार कर मिट्टी परीक्षण में जुटे हैं। घरोट तक ट्रैक बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए मार्च 2015 से पूर्व अधिसूचना जारी करने का लक्ष्य रखा है।
20 किलोमीटर में पंजाब के नौ और हिमाचल के 11 गांव जद्द में आएंगे। एसडीएम बिलासपुर डॉ. एमएल मेहता ने बताया कि भानुपल्ली से धरोट तक अंतिम सर्वे कार्य शुरू हो गया है। इससे पीछे पंजाब में वहां का प्रशासन भू अधिग्रहण कार्य को देख रहा है।
मां नयनादेवी से 14 किमी दूर होगा ट्रैक
भानुपल्ली से बिलासपुर के बैरी तक प्रस्तावित पहले चरण के तहत नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र के धरोट तक रेलवे ट्रैक बनेगा। धरोट में प्लेटफार्म का निर्माण होगा। यहां से शक्तिपीठ नयनादेवी मंदिर की दूरी लगभग 14 किलोमीटर रहेगी। 20 किलोमीटर के इस ट्रैक पर सात टनल का निर्माण किया जाएगा।