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मनोरोगी को अस्पताल की बजाय रेन बसेरा में ही छोड़ आई पुलिस

Fri, 06 May 2022 11:42 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 11:42 PM IST
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question raised on police action
शिकायत के बाद फिर आईजीएमसी में करवाया दाखिल
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12 मई तक डॉक्टरों की निगरानी में चलेगा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर से रेस्क्यू किए एक मनोरोगी को पुलिस अस्पताल लाने के बजाय रेन बसेरा में ही छोड़ आई। कायदे से मनोरोगी को अस्पताल लाकर उपचार दिलाया जाना चाहिए था। हालांकि बाद में जब सामाजिक संस्थाओं ने इसकी शिकायत एसपी से की तो मनोरोगी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) लाया गया। अब मनोरोगी का यहां उपचार चल रहा है। उपचार के बाद मनोरोगी को मानसिक स्वास्थ्य एवं पुर्नवास अस्पताल बालूगंज शिफ्ट किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक एक मनोरोगी को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी सवीना जहां और यश ठाकुर ने तीन मई को शिमला शहर के टूटीकंडी में बारिश में भीगते हुए देखा। इसकी जानकारी उन्होंने उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव को दी।
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उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष ने बालूगंज थाना प्रभारी को फोन कर मनोरोगी को कानून के तहत रेस्क्यू करने का आग्रह किया। प्रभारी ने भी सूचना मिलने के बाद एक सिपाही को रेसक्यू के लिए भेज दिया। अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों और हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करके उसे ऑकलैंड टनल के पास नगर निगम के रैन बसेरा में छोड़ दिया। श्रीवास्तव के मुताबिक अगले दिन जब उनको इसकी सूचना मिली तो इसकी शिकायत एसपी शिमला मोनिका भुटूंगरु से की। इसके बाद उनके निर्देशों पर मनोरोगी को आईजीएमसी लाया गया। मनोरोग वार्ड में मरीज को दाखिल किया है। मनोरोगी अब 12 मई तक डॉक्टरों की निगरानी में आईजीएमसी में दाखिल रहेगा। इसके बाद इसे मानसिक मनोरोग एवं पुनर्वास केंद्र बालूगंज शिफ्ट किया जाएगा। यहां ठीक होने के बाद मनोरोगी के परिजनों से संपर्क कर इसे इसके घर तक पहुंचाया जाएगा।
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मनोरोगी के पास से मिला है आधार कार्ड
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि मनोरोगी के पास से मोहम्मद शाकिर नाम का आधार कार्ड मिला है। लेकिन यह उसके हुलिये से मेल नहीं खाता। बताया कि अगर उसे लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ेगी तो राज्य मनोरोग अस्पताल में भेजा जाएगा।
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