15 दिन में नालियों और नालों की सफाई करेंगी पंचायतें, मानसून से निपटने को निर्देश जारी
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हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतें और अन्य पंचायती राज संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों में नालियों, चैनलों और नालों की सफाई करेंगी। नगर निकायों को भी सफाई करनी होगी।इसमें लोक निर्माण विभाग सहयोग करेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों और अन्य विभागों के साथ मानसून से संबंधी तैयारियों की समीक्षा बैठक ली।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग, नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को 15 दिन में नालियों, चैनलों, नालों आदि की सफाई का काम करने के निर्देश दिए।बाल्दी ने सभी डीसी को निर्देश दिए कि वे आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान करें और नुकसान को रोकने के लिए तथा सड़कों को अवरोधित करने वाले उखड़े पेड़ों को हटाने के लिए जरूरी व्यवस्था करें।
चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए विशेष ध्यान देना जरूरी : डा. बाल्दी
उन्होंने मानसून की शुरुआत से पहले पुलों के जीर्णोद्धार और सड़क के किनारे के मलबे को साफ करने के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए, जबकि सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि वे जलजनित बीमारियों के प्रकोप को रोकने के लिए जल स्रोतों की नियमित सफाई सुनिश्चित करें।
डा. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि राज्य में चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए विशेष ध्यान देना जरूरी है। कुल्लू और डलहौजी में स्थानों की पहले ही पहचान कर ली गई है। रामपुर और मंडी में एनडीआरएफ के राहत और बचाव बेस स्थापित होंगे।
उन्होंने बिजली अधिकारियों को अचानक पानी के प्रवाह से होने वाले नुकसान से बचने के लिए और जनता को सतर्क करने को उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। यह चेतावनी प्रणाली असुरक्षित क्षेत्रों के लोगों को स्थानांतरित करने और खाली करने में मदद करेगी।
इस बैठक में केंद्रीय जल आयोग को इसकी नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए गए। राहत और बचाव के बारे में जानकारी नियमित रूप से एफएम केंद्रों, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनता को उपलब्ध कराई जाएगी।
बचाव टीमों को सतर्क रहने के निर्देश
सभी जिला मुख्यालयों को पहले से ही सैटेलाइट फोन उपलब्ध करवाए गए हैं। ये जरूरत के अनुसार और अधिक प्रदान किए जाएंगे। डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्रों यानी आईटीबीपी की स्थानीय इकाइयों, भारतीय सेना और स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की राहत तथा बचाव टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
यह जरूरी है कि खराब मौसम की स्थिति में ट्रैकिंग और अन्य यात्राओं को प्रतिबंधित किया जाए। ट्रैकर्स की सुरक्षा के लिए एक जीपीएस उपकरण होना जरूरी किया जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में हरसंभव सहायता प्रदान की जा सके। विशेष सचिव राजस्व और आपदा प्रबंधन डीसी राणा ने मानसून के दौरान किसी भी घटना से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत करवाया।