लोनिवि, एनएच-आईपीएच विभाग के कर्मियों की छुट्टियों पर लगी रोक
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प्रदेश में मानसून की दस्तक देते ही लोनिवि, एनएच अथॉरिटी और आईपीएच विभाग ने कमर कस ली है। विभागों ने बरसात से निपटने के लिए अपने फील्ड कर्मचारियों की छुट्टियों पर सितंबर माह तक रोक लगा दी है। इस बार जिला कुल्लू में बरसात अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन किसी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहता है। मानसून आते ही लोनिवि के साथ एनएच अथॉरिटी और आईपीएच विभाग अभी से सक्रिय हो गए हैं।
बरसात में सबसे अधिक नुकसान भी इन्हें उठाना पड़ता है। लोक निर्माण कुल्लू ने अपने करीब 1300 फील्ड कर्मियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। इसके साथ आईपीएच ने 600 और एनएच अथॉरिटी ने करीब 100 कर्मियों को यह आदेश जारी किए हैं। हालांकि अभी तक हुई बारिश से किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन जिस तरह इस बार की सर्दी में रिकॉर्डतोड़ बर्फबारी होने से 30 से 50 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
ऐसे में जिलावासियों के साथ संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी बरसात के भी अधिक होने की आशंका है। बरसात के दिनों में जिले में सेब सहित अन्य फल व सब्जियों का सीजन भी शुरू हो जाता है तथा बरसात में सड़कों के बंद होने से किसानों-बागवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभाग ने अपने अधिकारियों को बरसात के मौसम से निपटने के लिए भूस्खलन से संवदेनशील इलाकों पर जेसीबी, डोजर व अन्य मशीनरी की उचित व्यवस्था रखने को भी कहा गया है।
लोनिवि कुल्लू के अधिशासी अभियंता एसके धीमान ने कहा कि मानसून की बारिश से बंद होने वाली सड़कों को समय पर पहले खोलने व लोगों को किसी तरह की मुश्किलें न हो, ऐसे में फील्ड में काम करने वाले कर्मियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है।
आईपीएच कुल्लू के अधिशासी अभियंता केआर कुल्लवी ने कहा कि बरसात में पानी की योजनाएं प्रभावित न हो, इसके लिए आईपीएच ने भी अपने कर्मचारियों के अवकाश पर एहतियातन रोक लगा दी है। सितंबर माह तक आपातकालीन स्थिति को छोड़कर किसी भी कर्मचारी को छुट्टी नहीं मिलेगी।
दो एनएच समेत 100 से अधिक सड़कें संवेदनशील
बरसात में भूस्खलन के लिहाज से जिला कुल्लू अति संवेदनशील है। एनएच-305 के साथ चंडीगढ़-मनाली हाईवे 3, मनाली-केलांग-लेह, ग्रांफू-काजा, लारजी-सैंज मार्ग कुल्लू-पीज, भुंतर-मणिकर्ण, बरशैणी, रोहाचला, कुठेड़-करशाला, छमाहण, बस्तोरी, जाणा, मलाणा के अलावा खराहल, लगवैली, मणिकर्ण, सैंज, आनी तथा बंजार इलाके की करीब 100 से अधिक ऐसी सड़कें हैं, जो बरसात में यातायात के लिए प्रभावित हो जाती हैं।