यहां पुजारी ने साहित्यकारों को बलग मंदिर में प्रवेश से रोका
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शिमला जिले के दूरदराज गांव कुठाड़ में 20 साहित्यकारों का राजा बलि से जुडे़ माने जाने वाले बलग में ग्रामीणों ने भव्य स्वागत तो किया, लेकिन ऐतिहासिक मंदिर में प्रवेश करने से पुजारी ने साफ इंकार किया। इससे लेखकों में नाराजगी है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि बलग मंदिर का सरकारीकरण हो। इसे पुरातत्व विभाग के अधीन किया जाए। यह जानकारी वरिष्ठ कथाकार एसआर हरनोट ने दी। शिमला से कुठाड़ तक 70 किलोमीटर यात्रा में लेखकों के भ्रमण और साहित्य संवाद का पहला चरण बलग गांव में था।
हरनोट ने कहा कि इस दौरान बलग गांव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर तकरीबन एक घंटे तक चर्चा चली, लेकिन नियमों की दुहाई देकर मंदिर में लेखकों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। इससे लेखक दसवीं शताब्दी में निर्मित इस शिखर शैली के भव्य मंदिर के दर्शन नहीं कर पाए।
हर समय सभी के प्रवेश की अनुमति नहीं : अध्यक्ष
मंदिर के मुख्य गेट पर पहले ही ताला लगा दिया गया था। वजह पूछी गई तो ग्रामीणों ने रीति-रिवाजों और नियमों की दुहाई दी और कहा कि मंदिर में प्रवेश बंद कर दिया गया है। लेखकों ने मांग की है कि इस भव्य ऐतिहासिक मंदिर परिसर को तत्काल सरकार अपने अधीन लेकर पुरातत्व विभाग को सौंप दे।
मंदिर कमेटी बलग के अध्यक्ष प्रेमदत्त शर्मा ने बताया कि देव समाज के नियमों के अनुसार मंदिर में हर समय सभी के प्रवेश की अनुमति नहीं है। गांव के लोगों को भी मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है।
केवल साल में एक बार उत्सव के दौरान मंदिर कमेटी के सदस्य ही इसमें प्रवेश करते हैं। इसके बाद मंदिर में हमेशा ताला लगा होता है। फिलहाल, पुजारी को ही अंदर जाने की अनुमति है।