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दो दिसंबर को विरोध दिवस मनाएंगे कर्मचारी
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:03 PM IST
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें सामने आने के बाद केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के पंजाब, जम्मू-कश्मीर के प्रभारी एवं प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री एनआर ठाकुर ने आयोग की सिफारिशों को कर्मचारी विरोधी बताया है। कहा कि इससे छोटे दर्जे के कर्मचारियों विशेषकर चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को भारी नुकसान होगा।
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अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतनमान में भी जमीन-आसमान का अंतर दिख रहा है। इन कर्मचारी विरोधी सिफारिशों का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया जा रहा है। सभी राज्यों के कर्मचारी दो दिसंबर को विरोध दिवस के रूप में मनाएंगे। धरने-प्रदर्शन कर सरकार को ज्ञापन भी सौंपेंगे।
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आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक एक सचिव स्तर के अधिकारी का वेतन 2 लाख 25 हजार मासिक होगा, वहीं न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये तक देने का प्रस्ताव है। इससे छोटे कर्मचारियों की अनदेखी हुई है। आयोग ने कर्मचारियों के वेतन में मात्र 14.29 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। यह एक साल के महंगाई भत्ते के बराबर भी नहीं है। 52 भत्तों को खत्म करना कर्मचारियों से घोर अन्याय है।
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महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि न्यूनतम और अधिकतम वेतनमान का अनुपात 1:12.5 के बजाय 1:10 किया जाए, न्यूनतम वेतनमान 18 हजार से बढ़ाकर 24 हजार रुपये दिया जाए, वेतन निर्धारण का फार्मूला 2.57 के स्थान पर 3.42 किया जाए, वार्षिक वेतन वृद्धि 3 प्रतिशत के बजाय 5 प्रतिशत, एमसीपी 3 के बजाय 5 पदोन्नति वेतनमान पर सुनिश्चित करना, मकान किराया भत्ता 16 एवं 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 15, 25 और 37 प्रतिशत करना तथा रिस्क भत्ता आदि देना शामिल हैं।