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परीक्षा ड्यूटी में प्रोफेसर ने देखा छात्रवृत्ति हड़पने का खेल, सीएम को लिखा पत्र

Sun, 23 Dec 2018 01:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 23 Dec 2018 01:00 PM IST
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Professor writes letter to cm jairam thakur over over scholarship scam in himachal

अंबाला के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सुपरिंटेंडेंट रहे सहायक प्रोफेसर विनय गोयल ने छात्रवृत्ति की राशि हड़पने के खेल पर बड़ा खुलासा किया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ई-मेल भेजकर उन्होंने मामले की जांच उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से करवाने की मांग की है। कहा है कि बच्चों को स्कॉलरशिप तभी दी जाए, जब वे कम से कम 50 प्रतिशत पेपरों में पास हों।

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ई-मेल में लिखा है कि निजी संस्थानों में बहला-फुसलाकर पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला दे दिया जाता है। कहा जाता है कि उन्हें न तो कक्षाएं लगाने की जरूरत है और न ही कॉलेज आने की। परीक्षा में किन्हीं दो पेपर में सिर्फ  हाजिरी लगानी है। पेपर में कुछ लिखने की भी जरूरत नहीं। सिर्फ  दो पेपर में हाजिरी लगाने से स्कॉलरशिप की राशि खाते में आ जाएगी।

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Professor writes letter to cm jairam thakur over over scholarship scam in himachal

संबंधित खाते की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड आदि कॉलेज वाले अपने पास रख लेते हैं। खाते में राशि आते ही उसमें से कुछ पैसे बच्चों को दे दिए जाते हैं और शेष राशि कॉलेज प्रबंधन डकार जाता है। इस तरह कॉलेज लाखों-करोड़ों का हेरफेर करते हैं। 

 प्रो. विनय ने लिखा है कि उन्हें कुरुक्षेत्र विवि ने नवंबर-दिसंबर 2018 में होने वाली सेमेस्टर परीक्षा के लिए अंबाला के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया था। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर रेगुलर विद्यार्थी हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से हैं।

वे शिक्षकों को तो दूर अपनी कक्षाओं के बारे में भी नहीं जानते हैं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो पता चला कि उनका दाखिला यहां सिर्फ स्कॉलरशिप के लिए ही हुआ है। जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि कॉलेज ने कुछ एजेंट नियुक्त किए हैं। ये बहला-फुसलाकर पिछड़े वर्ग के बच्चों का यहां दाखिला करवाते हैं।

‘हम तो स्कॉलरशिप केस वाले विद्यार्थी हैं’

Professor writes letter to cm jairam thakur over over scholarship scam in himachal

सहायक प्रोफेसर के मुताबिक परीक्षाओं में नियमित विद्यार्थी पांच में से तीन परीक्षा में अनुपस्थित रहे। जब वे चौथा पेपर देने आए तो उनसे पूछा कि वे पहले तीन पेपर में क्यों नहीं आए तो उनमें से कुछ ने बताया कि वे स्कॉलरशिप केस वाले विद्यार्थी हैं। इससे पता चला कि किस तरह निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हिमाचल और केंद्र सरकार को चूना लगा रहे हैं।

कहा है कि परीक्षा और बच्चों की हाजिरी का रिकॉर्ड ई-मेल के साथ भेज सकता था, लेकिन यह रिकॉर्ड सरकारी है और यूनिवर्सिटी का है। इस वजह से इसे मेल के साथ संलग्न नहीं कर रहा हूं। उधर, राज्य के शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा ने कहा कि सरकार के पास सहायक प्रोफेसर डॉ. विनय गोयल की ई-मेल आई है। इस मामले में जांच की जा रही है। 

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