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विवि में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से कैसे भरेंगे प्रोफेसर के पद
Fri, 17 Jan 2020 01:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 17 Jan 2020 01:07 PM IST
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HPU Shimla
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल विश्वविद्यालय ने शिक्षक भर्ती में यूजीसी के 200 प्वाइंट आरक्षण रोस्टर लागू जरूर किया है, मगर प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के पदों में से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्सूएस) के लिए सीटें आरक्षित की हैं। विभिन्न विभागों के इन पदों लिए पात्रता शर्तें पूरी करने वाले उम्मीदवारों का मिलना संभव नहीं लगता। दोनों पदों के लिए यूजीसी के तय मानकों में आठ से दस साल का शिक्षण अनुभव मांगा है। जो व्यक्ति 8 साल से पढ़ा रहा होगा, उसकी आय इतनी तो होगी कि जो ईडब्ल्यूएस के लिए तय चार लाख की वार्षिक आय की सीमा पार करता हो।
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यूजीसी के तय स्केल के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर को 90 हजार तक मासिक, जबकि प्रोफेसर को एक से एक लाख 40 हजार तक वेतन मिलता है। ऐसे में दोनों पदों को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए आरक्षित रखना कहां तक तर्कसंगत है। रोस्टर लागू करने में पात्र अभ्यर्थियों की उपलब्धता पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
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भर्ती के लिए निकाले गए विवि के विज्ञापन में केमिस्ट्री, इतिहास विषय में प्रोफेसर के पद इस श्रेणी के लिए आरक्षित रखे हैं। भर्ती रोस्टर और इसके लिए जारी विज्ञापन में विधि, गणित, फिजिक्स, समाज शास्त्र, हिंदी इक्डोेल के अलावा रिजनल सेंटर धर्मशाला में प्रोफेसर स्तर के पद अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर के पद आरक्षित रखे गए हैं। यदि उम्मीदवार न मिले तो जाहिर है कि इन वर्गों की सीटें खाली रहेंगी या इन्हें बदलना पड़ेगा।
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एक्स सर्विस मैन श्रेणी में भी आसान नहीं अभ्यर्थी मिलना
एचपीयू के एसोसिएट प्रोफेसर के पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पदों केमिस्ट्री, यूआईआईटी, योग और भूगोल में सीटें आरक्षित की गई हैं। इसमें भी यूजीसी की पात्रता शर्तें पूरी करने वाले अभ्यर्थी शायद ही मिलें।
भर्ती में खाली ईडब्लूएस की खाली सीटें अनारक्षित वर्ग से भरी जाएंगी
विवि के विज्ञापन में कहा गया है कि यदि ईडब्लूएस श्रेणी की सीटें खाली रहती हैं तो इन्हें अनारक्षित वर्ग से भरा जाएगा। इसमें और समय लगेगा या दोबारा से पद विज्ञापित करने पड़ेंगे। अनारक्षित वर्ग की मेरिट कैसे बनेगी, उसके लिए आवेदन नए सिरे से मंगवाने पड़ सकते हैं।