इनका मुरीद हुआ गांधी परिवार, प्रियंका ने की जमकर तारीफ
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शिमला के छराबड़ा स्थित प्रियंका गांधी के सपनों के आशियाने की स्लेटनुमा छत बनाने वाले मंडी जिले के कारीगरों का गांधी परिवार मुरीद हो गया है। जिले के जंजैहली घाटी के बगस्याड़ के कारीगर आलम चंद और भाग सिंह द्वारा तैयार की गई छत प्रियंका और सोनिया गांधी को खूब पसंद आई है।
प्रियंका ने तो हिमाचल की प्राचीन काष्ठकला को कायम रखते हुए आज भी मूर्त रूप देने के लिए दोनों की जमकर तारीफ की है। प्रियंका के घर पर स्लेट भी मंडी का ही लगा हुआ है। इससे पहले शैली पसंद न आने पर प्रियंका अपने निर्माणाधीन घर को तुड़वा भी चुकी हैं।
भवन का काम अंतिम चरण में चला हुआ है। जल्द ही पूजा-पाठ करवाकर प्रियंका यहां रहना शुरू कर देंगी। जंजैहली घाटी के मुरहाग निवासी ठेकेदार प्यारे राम ने प्रियंका गांधी के मकान के निर्माण का ठेका लिया था।
दोनों कारीगरों को यह है मलाल
प्रियंका ने प्यारे राम को काष्ठकुणी शैली में अपने मकान की छत पर स्लेटनुमा छत बनाने के लिए कुशल कारीगर लाने को कहा था। ठेकेदार ने जब बगस्याड़ के दोनों हुनरमंदों को छराबड़ा पहुंचाया तो उनकी कारीगरी देख प्रियंका गदगद हो गईं।
कारीगर आलम चंद का कहना है कि उन्होंने प्रियंका के मकान की स्लेटनुमा छत को बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। काम की तारीफ सुनकर वह गर्व महसूस कर रहे हैं।
भाई से सीखा है हुनर
आलम चंद ने छत की कारीगरी का काम अपने भाई दयाराम से सीखा था। हालांकि, दया राम कंकरीट का मिस्त्री था। लेकिन आलम का शौक बचपन से ही लकड़ी पर कारीगरी का था।
शिष्य भाग सिंह भी काष्ठकुणी शैली की बारीकियों को आलम से काफी हद तक सीख चुका है। अब दोनों ही निर्माण की शैली में साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
दोनों कारीगरों को मलाल है कि हिमाचल में कंकरीट निर्माण की संस्कृति ने प्राचीन काष्ठकुणी शैली को बुरी तरह से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि मंडी, कुल्लू और शिमला जिले में वे अनेक मकानों को काष्ठकुणी शैली का रूप दे चुके हैं।
इस शैली की खासियत लकड़ी पर की गई नक्काशी है, जो हिमाचल कला की एक विशेष पहचान है। इसे हाथ से उकेरा जाता है। इसी वजह से इसमें खासा समय लगता है।