हिमाचल में उपनिदेशकों की मंजूरी के बाद ही फीस वसूल सकेंगे निजी स्कूल
हिमाचल में जिलों के शिक्षा उपनिदेशकों की मंजूरी के बाद ही निजी स्कूल अब फीस वसूल सकेंगे। कैबिनेट के फैसले की अनदेखी कर अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की मनमानी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह फैसला लिया है। निदेशालय ने सरकार की ओर से तय की गई फीस से अधिक फीस लेने वाले निजी स्कूलों का ब्योरा भी तलब कर दिया है। निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि साल 2019 में तय की गई ट्यूशन फीस से अधिक कोई भी निजी स्कूल नहीं ले सकता है। आदेशों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ एपेडेमिक एक्ट में कार्रवाई की जाएगी।
छात्र अभिभावक मंच की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी निजी स्कूलों को आदेश जारी कर कोरोना संकट के बीच फीस वसूलने से पहले जिला उपनिदेशकों को इसकी जानकारी देने को कहा है। उपनिदेशक देखेंगे कि साल 2019 में कितनी ट्यूशन फीस तय थी और अब कितनी तय की गई है। फीस का सही निर्धारण करने वाले स्कूलों को तत्काल फीस वसूली की मंजूरी दे दी जाएगी। जो स्कूल फीस में बढ़ोतरी करते हुए पाए जाएंगे, उनकी जानकारी उच्च शिक्षा निदेशालय को दी जाएगी। ऐसे स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया कि सरकार ने फिलहाल बीते साल तय की गई ट्यूशन फीस ही निजी स्कूलों को लेने को कहा है। अन्य फंड स्थगित किए गए हैं।
मई महीने में ही कई चार्ज लगाकर वसूल ली फीस
वहीं, सरकार के निर्देशों के बावजूद शहर के कई स्कूलों ने जबरन अभिभावकों से फीस वसूल कर ली। ट्यूशन फीस के साथ स्कूलों के अन्य चार्ज भी वसूल कर लिए हैं। स्कूलों की मनमानी से साफ है कि इन पर किसी की लगाम नहीं है। लॉकडाउन और फीस को लेकर गाइडलाइन जारी करने से पहले सरकार ने स्कूलों से साफ किया था कि अभिभावकों से जबरन फीस नहीं वसूल की जा सकती है।
बावजूद कई स्कूलों ने चुपचाप अभिभावकों पर दबाव बनाकर मई महीने में ही फीस वसूल कर ली है। इसका खुलासा छात्र-अभिभावक मंच ने किया। स्कूलों की फीस की रसीदें इस दौरान निदेशक को सौंपी गई। मंच ने विभाग से ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। मंच ने यह भी अंदेशा जताया है कि गाइडलाइन जारी होने के बाद भी कई स्कूल मनमानी कर सकते हैं।
ऐसे स्कूलों पर नजर रखी जानी चाहिए। स्कूलों की मनमानी के खिलाफ संघर्ष कर रहे छात्र अभिभावक मंच के पदाधिकारियों ने सोमवार को मनमानी फीस वसूलने के प्रमाण के रूप में दो स्कूलों की रसीद भी निदेशक को सौंप कर कार्रवाई की मांग की। मंच संयोजक ने आरोप लगाया है कि स्कूलों ने फीस बढ़ाई है। एनुअल चार्ज को ट्यूशन फीस में जोड़कर न सिर्फ अभिभावकों और सरकार को भ्रमित किया है, बल्कि आदेशों को ठेंगा दिखाया है।
केस एक : एक कान्वेंट स्कूल ने 14 मई को ली फीस में पहले क्वार्टर की 9520 ट्यूशन फीस, 10,500 एनुअल चार्ज, 850 रुपये ई चार्जेज के रूप में लेकर कुल 20,670 रुपये वसूल लिए हैं।
केस दो : दूसरे स्कूल की रसीद में 6 मई को एनुअल चार्जेज 7,650, ट्यूशन फीस 2480 रुपये के साथ कुल 10,130 रुपये की वसूली की रसीद जारी की है। यूकेजी कक्षा के विद्यार्थी से 13 मई को 10,130 रुपये लेकर रसीद दी है।
कैबिनेट फैसला नहीं मान रहे स्कूल, ट्यूशन फीस में जोड़ दिए कई फंड : विजेंद्र
निजी स्कूलों के लिए राज्य मंत्रिमंडल से तय हुई ट्यूशन फीस में कई अन्य फंड भी शामिल होने पर छात्र अभिभावक मंच ने मोर्चा खोल दिया है। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने बताया कि निजी स्कूल कैबिनेट के फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कोरोना संकट के बीच बंद रहे चल रहे निजी स्कूलों की ओर से लिए जा रहे अन्य तरह के सभी फंड को स्थगित करने की जगह रद्द करने की मांग भी की है। छात्र अभिभावक मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर शीतकालीन निजी स्कूल अभिभावकों से मार्च से मई की तिमाही की फीस 10 मार्च से पूर्व और ग्रीष्मकालीन निजी स्कूल 10 अप्रैल से पूर्व फीस वसूल कर लेते हैं।
निजी स्कूलों के लगभग 70 प्रतिशत अभिभावक निजी स्कूलों की ओर से फीस को लेकर बार-बार भेजे गए मोबाइल संदेशों के दबाव में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में इस तिमाही में एनुअल चार्ज, एडमिशन फीस, कंप्यूटर फीस, स्मार्ट क्लास रूम चार्ज, स्पोर्ट्स चार्ज, केयरज फंड, मिसलेनियस फंड व अन्य सभी प्रकार के फंड और फीस को कैबिनेट का निर्णय आने से पूर्व ही जमा कर चुके हैं। इस जमा फीस में ट्यूशन फीस भी वर्ष 2020 में आठ से बीस प्रतिशत तक बढ़ाई गयी फीस के आधार पर ही वसूली गई है।