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मनमानी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों का आज से होगा निरीक्षण

Tue, 09 Apr 2019 10:04 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 09 Apr 2019 10:04 AM IST
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Private schools inspection  from today in himachal
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मनमाने तरीके से फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों का मंगलवार से औचक निरीक्षण शुरू होगा। सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय में छात्र-अभिभावक मंच के प्रदर्शन के बाद हरकत में आए अधिकारियों ने निरीक्षण के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

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निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया है कि निजी स्कूलों से बातचीत का समय खत्म हो गया है अब एक्शन लेने का समय है। उन्होंने सूबे के निजी स्कूलों को 15 दिनों के भीतर पीटीए का गठन करने के आदेश दिए हैं। इसमें 75 फीसदी सदस्य अभिभावक बनाने होंगे।
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उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया कि मंगलवार से उपनिदेशक कार्यालय के स्तर पर गठित टीमें अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड खंगालेंगी।

यदि फीस में बढ़ोतरी पाई गई तो इसे लौटाने के लिए अगला कदम उठाया जाएगा। स्कूलों में कॉपी-किताब बेचने के चल रहे स्टोर सील किए जाएंगे। निजी स्कूलों को खुद परिवहन सुविधा भी देनी होगी।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाने की भी लेनी होगी मंजूरी

शिक्षा निदेशालय एचआरटीसी को पत्र लिखकर बसों में बस पास की एवज में हर छात्र को सीट सुनिश्चित करने के लिए दिशा निर्देश देगा। ओवरलोडिंग पर एचआरटीसी बसों पर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों से फीस स्ट्रक्चर और ऑडिट रिपोर्ट के दस्तावेज मांगे गए हैं। कुछ ऐसे स्कूल हैं, जो बैठकों में नहीं आए हैं। ऐसे स्कूलों को अलग से बुलाकर जानकारी जुटाई जा रही है।

आदेश नहीं मान रहे स्कूलों की जिला स्तर पर गठित विभाग की टीमें छानबीन करेगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में स्कूल वर्दी, किताबें और अन्य सामग्री अपनी मर्जी से नहीं बेच सकेंगे।

उन्होंने बताया कि अब तक बने रूल 2003 और एक्ट 1997 का मकसद निजी स्कूलों पर नियंत्रण ही रहा है। इसके तहत कार्रवाई हो सकती है। यदि कानून या निजी स्कूलों के नियंत्रण को नियामक आयोग बनाने की जरूरत महसूस हुई तो इसका प्रस्ताव भी निदेशालय सरकार को भेजेगा।

 प्रदेश के निजी स्कूलों को अब सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी उच्च शिक्षा निदेशालय से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इन कार्यक्रमों में बंटने वाले सामान की रेट लिस्ट भी स्कूलों को मंजूर करवानी होगी। अब निजी स्कूल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों को पहनाई जाने वाले किराए की ड्रेस के लिए अभिभावकों से मनमाफिक पैसा नहीं ले सकेंगे।

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