स्कूल प्रबंधनों का नया कारनामा, नए शैक्षणिक सत्र के लिए रेट कार्ड किए जारी
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शिक्षा के क्षेत्र में अभिभावकों से लूट का नया कारनामा सामने आया है। नए शैक्षणिक सत्र से अब बच्चे रेगुलर क्लास के साथ स्कूल में ट्यूशन भी पढ़ेंगे। इसके लिए स्कूलों ने बाकायदा बच्चों की ट्यूशन फीस भी निर्धारित कर दी है।
एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूलों ने रेट कार्ड जारी कर दिए हैं। रेट कार्ड के अनुसार वार्षिक शुल्क, प्रिंटिंग चार्जेस और फीस कार्ड सहित अन्य खर्चों को मिलाकर प्री नर्सरी से जमा दो में प्रवेश के लिए करीब तीन हजार रुपये से पांच हजार रुपये देने होंगे।
रेट कार्ड में इस बार प्रवेश शुल्क और मासिक फीस के साथ पहली बार एक्सट्रा क्लास फीस देने के निर्देश भी हैं। छह माह के लिए नौवीं और दसवीं की गणित और विज्ञान विषय की दो एक्सट्रा क्लासेस के 200 रुपये प्रति माह, जबकि जमा एक और जमा दो की गणित/बायोलॉजी, कैमिस्ट्री और फिजिक्स की दो विषयों की एक्सट्रा क्लास के 500 रुपये प्रति माह के हिसाब से छह माह की फीस देनी होगी।
इसके अलावा प्री नर्सरी से जमा दो तक के विद्यार्थियों से वार्षिक शुल्क के रूप में दो हजार रुपये से चार हजार रुपये प्रवेश के समय देने होंगे। वहीं ढाई सौ से 500 रुपये प्रिंटिंग चार्जेस सहित फीस कार्ड के 20 से 50 रुपये भी अभिभावकों से निजी स्कूल वसूलेंगे।
शिक्षा विभाग ने हर साल प्रवेश शुल्क न लेने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा स्कूलों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने पर भी रोक लगाई गई है लेकिन अभिभावकों को लूटने के लिए निजी स्कूल आए दिन नए फॉर्मूले तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में बच्चों को ट्यूशन फीस लेकर एक्सट्रा क्लास लगवाने का नया फॉर्मूला खोजा है।
निजी स्कूलों के फीस स्ट्रक्चर पर विभाग की नजर है। निजी स्कूलों में एक्सट्रा क्लास के नाम पर ट्यूशन फीस वसूलने की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत आने पर उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। - राजकुमार शर्मा, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा जिला कांगड़ा
निजी स्कूलों में फीस के बदले में बच्चों को सुविधाएं भी दे रहे हैं। बच्चों से प्राप्त फीस से ही निजी स्कूलों का संचालन किया जाता है। सरकार निजी स्कूलों के संचालन के लिए बजट जारी करे। फिर निजी स्कूल बच्चों से फीस नहीं लेंगे। - राजेश रॉकी, प्रदेश अध्यक्ष निजी स्कूल एसोसिएशन