आरटीआई के दायरे में होंगे हिमाचल के निजी संस्थान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल विधानसभा से पारित कानून के तहत प्रदेश में स्थापित निजी संस्थान भी आरटीआई एक्ट के दायरे में होंगे। हिमाचल सूचना आयोग ने एक अपील पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं कि ऐसे संस्थान पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में हैं या नहीं।
ऐसे संस्थानों को सरकार से आर्थिक मदद दी जाती है या नहीं, यह भी जरूरी नहीं। यही व्यवस्था प्रदेश के तमाम निजी विश्वविद्यालयों के मामले में भी लागू होगी। निजी विश्वविद्यालय आरटीआई एक्ट की अनुपालना के लिए बाध्य हैं।
उन्हें जन सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अथॉरिटी की नियुक्ति करनी ही होगी। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान के आरटीआई कोर्ट ने एक अपील पर कहा कि इसी कोर्ट ने अपने पांच मार्च 2014 के आदेश में भी साफ किया था कि बाहरा यूनिवर्सिटी पर आरटीआई के प्रावधान लागू होंगे।
प्रदेश में जितनी भी यूनिवर्सिटी हैं, उन सभी पर आरटीआई एक्ट लागू होगा। उन्हें जन सूचना अधिकारी और पहली अपीलीय अथॉरिटी की नियुक्ति करनी होगी।
यह था मामला
ऐसे में यह स्पष्ट है कि जो भी कोई संस्थान राज्य विधानसभा की ओर से पारित कानून के मुताबिक स्थापित हैं, वे सभी आरटीआई एक्ट की धारा 2(एच) के तहत आते हैं।
शिमला के घणाहट्टी क्षेत्र के जनोग गांव निवासी राहुल पराशर ने एपीजी यूनिवर्सिटी से सूचना मांगी। यूनिवर्सिटी ने दलील दी कि निजी विश्वविद्यालय आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आती।
इसके बाद पराशर ने सूचना आयोग में अपील की। इसी मामले में सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि एपीजी यूनिवर्सिटी पब्लिक अथॉरिटी है। यह आरटीआई एक्ट के प्रावधानों के तहत जवाब देने के लिए ड्यूटी बाउंड है।
इसे न केवल पीआईओ की तैनाती करनी होगी, बल्कि आरटीआई एक्ट के वैधानिक प्रावधानों की भी अनुपालना करनी होगी। यूनिवर्सिटी को आवेदक को मुफ्त में सूचना देनी होगी।